बक्‍सर डीएम के निर्देश पर गंगा में उपलाते श’वों की ली गई सुध, घाट पर पाे’स्‍टमार्टम के बाद की गई अंत्‍येष्टि

गंगा नदी में रामरेखा घाट पर बुधवार को एक बार फिर एक साथ चार शव बहते देखे गए। लोगों ने इसकी सूचना नगर परिषद के अधिकारियों तथा पुलिस को भी दी, बावजूद शाम तक किसी ने शवों के निस्तारण की व्यवस्था नहीं कराई। गुरुवार को कुछ लेाग शवों को नदी में बहाने के प्रयास में थे। इसी दौरान डीएम के संज्ञान में मामला आने के बाद शवों को बाहर निकाला गया। घाट पर ही मेडिकल टीम ने उनका पोस्‍टमार्टम किया। इसके बाद शव का निस्‍तारण कर दिया गया।

गंगा घाट निर्माण में लगे मजदूर सत्येंद्र मेहता व अजय कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार की सुबह काम के दौरान गंगा में बहते शवों को देखा गया। इनमें तीन पुरुष व एक महिला के शव थे। खबर फैलते ही घाट पर भीड़ लग गई। लोगों ने तत्काल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी प्रेम स्वरूपम से बात की तो उन्होंने पटना में किसी बैठक में व्यस्त होने व बक्सर में मौजूद नगर परिषद के कर्मियों को निर्देश देने की बात कही।

याद दिला दें कि कोरोना काल में भी गंगा नदी में कई शव लगातार मिले थे। तब बिहार से लेकर यूपी तक गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए शवों के जल प्रवाह की परंपरा पर रोक लगाई गई थी। जिला प्रशासन ने गंगा घाटों की निगरानी के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे।

इसके बाद इस पर रोक लग गई थी। लेकिन बुधवार को अचानक फिर शव देखे गए। एक साथ चार शव देख सनसनी फैल गई। गुरुवार को डीएम अमन समीर के निर्देश पर नदी किनारे जाकर ही शवों का पोस्‍टमार्टम किया गया। इसके बाद उनकी अंत्‍येष्टि कर दी गई।

रामरेखा घाट गंगा आरती सेवा ट्रस्ट के पुजारी अमरनाथ पांडेय उर्फ लाला बाबा का कहना है कि कुछ लोग अंधविश्वास में शवों को गंगा में प्रवाहित कर देते हैं। ऐसा करना धर्म संगत नहीं है।

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