बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के काॅलेज ऑडिट से भाग रहे हैं। संबद्ध काॅलेजाें के साथ अंगीभूत काॅलेज भी आय-व्यय से संबंधित कागजात जमा नहीं कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इस पर सख्त हाे गया है। कागजात जमा नहीं कराने वाले किसी भी काॅलेज में अब सीधे ऑडिट टीम धावा बाेलेगी। इसके लिए काॅलेज प्रशासन काे पिछले 6 साल के लेखा-जाेखा से संबंधित कागजात तैयार रखने हाेंगे।

सीएजी की टीम डेढ़ माह पहले विवि आई थी। उस वक्त ही काॅलेजाें काे कागजात तैयार रखने का निर्देश दिया गया था। बाद में विवि के कुलसचिव ने विवि के सेक्शन ऑफिसर, पीजी विभागाध्यक्ष, काॅलेज प्राचार्याें काे पत्र भेज आय-व्यय का लेखा जाेखा विवि में जमा कराने के लिए कहा। 27 अप्रैल तक सभी काे कागजात जमा कराने थे। लेकिन, 7-8 काॅलेजाें ने ही 24 बिंदुओं पर कागजात साैंपे। वह भी आधे-अधूरे। कुलसचिव डाॅ. आरके ठाकुर ने कहा कि सरकार के निर्देश पर सीएजी की टीम जांच कर रही है। सीएजी के पत्र के आलाेक में काॅलेजाें काे निर्देश दिए गए थे। कागजात नहीं जमा कराने वाले काॅलेजाें में सीधे भी ऑडिट टीम जांच के लिए जाएगी। कहा कि जांच में हर तरह से सहयाेग किया जाएगा। इसमें काेताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विवि से काॅलेजाें का पूरा रिकॉर्ड मंगाने पर भी उठ रहे सवाल : विवि से काॅलेजाें का पूरा रिकार्ड मंगाने पर भी काॅलेज प्रशासन सवाल उठा रहे हैं। काॅलेज प्रशासन का कहना है कि पिछले 6 साल का हर खर्च का हिसाब-किताब विवि में जमा कराना संभव नहीं है। इस बहाने आर्थिक व मानसिक रूप से शाेषण किया जा रहा है। ऑडिट टीम काॅलेज में आकर जांच करे ताे सभी कागजात उपलब्ध कराए जाएंगे।

2015-16 से 2021-22 तक के खाते की हाे रही है जांच
सीएजी 2015-16 से 2021-22 तक के खाते-बही की जांच कर रही है। इससे संबंधित सारे रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। विवि में हुए खर्च का हिसाब-किताब मांगा गया है। लेकिन, काॅलेज ही नहीं विवि भी इसे उपलब्ध कराने में आना-कानी कर रहा है। विवि के ऑडिट विभाग के अनुसार, अधिकतर काॅलेज में वार्षिक लेखा ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने की आशंका है।

2015-16 से 2021-22 तक के खाते की हाे रही है जांच
सीएजी 2015-16 से 2021-22 तक के खाते-बही की जांच कर रही है। इससे संबंधित सारे रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। विवि में हुए खर्च का हिसाब-किताब मांगा गया है। लेकिन, काॅलेज ही नहीं विवि भी इसे उपलब्ध कराने में आना-कानी कर रहा है। विवि के ऑडिट विभाग के अनुसार, अधिकतर काॅलेज में वार्षिक लेखा ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने की आशंका है।