दरभंगा-झंझारपुर-सहरसा रेलखंड को पूरा करना नहीं था आसान, कैसे परियोजना हुआ पूरा…

मधुबनी। दरभंगा-सहरसा वाया झंझारपुर-निर्मली रेलखंड के आमान परिवर्तन का सफर लंबा रहा है। वर्ष 2003 की बात है। उस समय केन्द्र में रक्षा मंत्री स्व. जॉर्ज फर्नांडीस थे और रेल मंत्री के पद पर वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे।

रक्षा मंत्रालय दरभंगा-सहरसा रेलखंड एवं झंझारपुर-लौकहा रेलखंड को सामरिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण मान रहा था। इसी के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय की सलाह पर रेल विभाग ने इस रेलखंड के आमान परिवर्तन की नींव वर्ष 2003 में रखी।

तत्कालीन रक्षा मंत्री एवं वर्तमान मुख्यमंत्री ने स्थानीय ललित नारायण जनता महाविद्यालय में इस रेलखंड की आधारशीला रखी। बड़े तामझाम के साथ कार्यक्रम हुआ, लेकिन दुर्भाग्यवश रक्षा मंत्रालय और रेल मंत्रालय इस कार्य को आगे नहीं बढा सका और यह परियोजना अधर में लटक गई।

जानकार कहते हैं कि इस योजना को राजनीतिक ग्रहण लग गया। इसके बाद वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से पूर्व झंझारपुर के तत्कालीन सांसद देवेन्द्र प्रसाद यादव ने एक बार फिर झंझारपुर जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशीला रखी।

 

बावजूद, वर्ष 2011 तक इस रूट पर छोटी गेज की सवारी गाड़ियां निर्मली और लौकहा तक दौड़ती रही। वर्ष 2017 में आमान परिवर्तन के लिए रेल विभाग ने मेगा ब्लॉक की घोषणा कर दी। उस समय केंद्र में एनडीए की सरकार थी। इन छह वर्ष में सहरसा की ओर से कुपहा तक रेल परिचालन कुछ माह पूर्व प्रारंभ हुआ और अब झंझारपुर-आसनपुर कुपहा रेलमार्ग पर गाड़ियों के परिचालन का शुभारंभ होने से लोगों ने राहत की सांस ली। लोग इसे सपना साकार होने जैसा मान रहे हैं।

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