पटना . साल 2018 में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए महिला विकास निगम की तीन योजनाओं का विस्तार होना था। इनमें से एक भी योजना का विस्तार नहीं हो पाया। पूरा साल बाल विवाह और दहेज प्रथा से संबंधित कैंपेनिंग व जागरुकता अभियान में बीता। दो नई योजनाएं शुरू हुईं। इसमें महिला सशक्तीकरण कोषांग और एडोलसेंट सेल था।
महिला सशक्तीकरण कोषांग की शुरुआत तीन अगस्त को मुख्यमंत्री ने की। इस कार्यालय को बनाने का उद्देश्य महिला विकास निगम और महिला सशक्तीकरण की नीतियों का सही संचालन कराना है। साथ ही इन नीतियों से जुड़े सभी आकड़ों का संकलन करना है।
पहले चरण में पटना के साथ-साथ अरवल, औरंगाबाद, पूर्णिया, सुपौल, मुजफ्फरपुर और किशनगंज में इसका उद्घाटन हुआ। दूसरे चरण में अन्य जिलों में इन कार्यालयों का काम 2 अक्टूबर तक पूरा होना था, जो कि पूरा नहीं हो सका। वहीं एडोलसेंट सेल का उद्देश्य बिहार के ग्रामीण इलाकों में रह रही लड़कियों को माहवारी और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूक करना था। साल 2018 में निगम की ओर से बाल विवाह और दहेज प्रथा रोकने के लिए बनाई गई योजनाओं पर काम हुआ। विभिन्न टास्क फोर्स का गठन कर ट्रेनिंग दी गई।

इनका होना था विस्तार
वन स्टॉप सेंटर : वन स्टॉप सेंटर आठ जिलों में काम कर रहा है। इसे हर जिले में महिला हेल्पलाइन से जोड़कर चलाना था। इसका उद्देश्य हिंसा का शिकार महिलाओं को सहायता देना है।
अल्पावास गृह : जून तक अल्पावास गृह का सभी जिलों में विस्तार करने की योजना थी। लेकिन ये कुछ ही जिलों तक सीमित रह गया। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल में रखना था।
महिला विशेष कोषांग : राज्य के 23 थानों तक ही कोषांग सिमट कर रह गया। जबकि विस्तार 233 थानों में अगस्त तक होना था। इसका उद्देश्य आपसी और पारिवारिक विवादों को सुलझाना था।