मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विभिन्न पीजी विभागों में कराए जा रहे शोध की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगा है। पीएचडी रेग्यूलेशन 2016 को सख्ती से लागू करने के बाद विश्वविद्यालय ने प्रत्येक छह महीने पर शोधार्थियों से प्रगति रिपोर्ट देने को कहा।
इसके लिए 30 अप्रैल तक समय सीमा तय की गई थी। वहीं पीजी विभागाध्यक्षों को पांच मई तक इसे विश्वविद्यालय में जमा कराने को कहा गया था, लेकिन अबतक 20 प्रतिशत शोधार्थियों ने प्रगति रिपोर्ट विभागों में जमा नहीं की है। जानकारी के अनुसार ये शोधार्थी अपने गाइड के संपर्क में ही नहीं हैं। इससे रिपोर्ट जमा नहीं कराई है। अब गाइड ही उनसे संपर्क कर शीघ्र रिपोर्ट जमा करने के लिए कह रहे हैं। इस क्रम में पता चला कि कई शोधार्थियों ने अपना संपर्क नंबर भी बदल लिया है।
शोधार्थियों की छमाही प्रगति रिपोर्ट को चार ग्रुपों में मार्क किया जा रहा है। जिन शोधार्थियों ने अबतक रिपोर्ट जमा नहीं की है उन्हें सक्रियता नहीं दिखाने से गैरजिम्मेदार की श्रेणी में रखा जाएगा।
दूसरी श्रेणी असंतोषजनक प्रदर्शन वाले शोधार्थियों की होगी। इसमें डाटा का संकलन नहीं करने वाले, सेमिनार में भाग नहीं लेने वाले, नए तथ्यों को शोध में समेकित नहीं करने व रिसर्च पेपर प्रकाशित नहीं होने पर असंतोषजनक प्रदर्शन की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं तीसरी संतोषजनक और चौथी श्रेणी अच्छे तरीके से शोधकार्य करने वालों की है।

शोधार्थियों की ओर से जमा की गई प्रगति रिपोर्ट में समानता मिल रही है। विभागों में इसको लेकर कक्षाएं भी चलाई गईं, लेकिन इसके बाद भी शोधार्थी रिपोर्ट को ठीक तरीके से नहीं लिख पा रहे हैं।
डीएसडब्ल्यू प्रो.अजीत कुमार ने बताया कि जिन शोधार्थियों की रिपोर्ट असंतोषजनक है उन्हें सुधार के लिए सुझाव दिया जाएगा। अगली रिपोर्ट में भी यदि उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहता है। ऐसी स्थिति में अगली एकेडमिक काउंसिल और परीक्षा बोर्ड की बैठक में रखकर उन शोधार्थियों का रजिस्ट्रेशन रद कराने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
