पटना। जातिगत जनगणना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इसके पक्ष में हैं। उन्होंने पहल की। नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मिला। यह बड़ी राजनीतिक घटना थी। लेकिन एक समय के बाद यह विषय परिदृश्य में ओझल हो गया था। अब फिर से मुख्य पटल पर आ गया है तो राजनीति भी शुरू हो गई है।
ताजा राजनीतिक घटनाक्रम यह है कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव मंद पड़ रही जातिगत जनगणना की मांग को फिर आवाज दे बैठे। गत मंगलवार को उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 72 घंटे के भीतर कोई सकारात्मक फैसला लें, अन्यथा वह पैदल ही दिल्ली चल देंगे। लेकिन नीतीश कुमार ने उन्हें 30 घंटे के भीतर ही बुला लिया।
आम तौर पर ऐसी मुलाकातों में किसी तीसरे की उपस्थिति जरूर होती है। लेकिन तेजस्वी से मुलाकात के बारे में बताया गया कि उस समय कोई तीसरा नहीं था। यहां तक कि सरकारी अधिकारियों को भी इस मुलाकात से दूर रखा गया था।
तीसरे की उपस्थिति न होने के बावजूद बैठक की खबर तेजस्वी के माध्यम से बाहर आई, जिसमें उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के लिए सहमत हैं।
वैसे देखा जाए तो इस जानकारी में कुछ भी नया नहीं है। मुख्यमंत्री तो पहले से ही सहमत हैं, सवाल है जनगणना कराने का।

