दो माह में 12 से 15 आयुवर्ग के 47 प्रतिशत का हुआ टीकाकरण

पटना। कोरोना संक्रमण के मामले में राजधानी पटना सबसे अधिक संवेदनशील रहा है। हाल के दिनों में धीरे-धीरे ही सही कोरोना संक्रमण के नए मामले बढ़े हैं। बावजूद इसके जिले में सतर्कता डोज लेने की रफ्तार बहुत धीमी है। अब तक जिले के 1 लाख 70 हजार 540 लोगों ने ही सतर्कता डोज ली है। जबकि, जिले में लक्षित 43 लाख 58 हजार 924 लोगों में से 37 लाख 19 हजार 716 लोग दूसरी डोज ले चुके हैं।

12 से अधिक और 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के टीकाकरण का हाल तो और भी बुरा है। 16 मार्च को जब अभियान शुरू हुआ था तो एक माह में सभी को पहली डोज देने की घोषणा की गई थी। दो माह बीतने के बाद भी अबतक 47 प्रतशित का ही टीकाकरण किया जा सका है।

बताते चलें कि इस आयुवर्ग के 2 लाख 95 हजार 166 बच्चों-किशोरों के लक्ष्य के विरुद्ध अबतक जिले में 1 लाख 40 हजार 357 का ही टीकाकरण किया जा सका है। हालांकि, 15 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम आयुवर्ग में टीकाकरण का प्रदर्शन बेहतर है। 4 लाख 93 हजार 191 लक्ष्य के विरुद्ध अबतक 4 लाख 42 हजार371 किशोरों को पहली या दूसरी डोज दी जा चुकी है।

जिले में अबतक 43 लाख 7 हजार 734 लोगों को पहली और 37 लाख 19 हजार 716 को दूसरी डोज दी जा चुकी है। वैक्सीन लेने वालों में सबसे अधिक संख्या 18 से 44 आयुवर्ग के लोग हैं। जिले में अबतक 42 लाख 45 हजार 319 पुरुष और 37 लाख 80 हजार 355 महिलाओं को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है।

बाध्यता नहीं होना भी कारण : टीकाकरण कार्य से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार धीमी रफ्तार का कारण अत्यधिक गर्मी भी है। आमतौर पर देखा जा रहा है कि 24 घंटे और रात नौ बजे तक टीकाकरण करने वाले केंद्रों पर सामान्य की अपेक्षा अधिक लोग पहुंच रहे हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले कोरोना टीकाकरण बाध्यकारी नहीं को जिस प्रकार से वायरल किया गया, वह भी धीमी रफ्तार का कारण हो सकता है।

डा. एसपी विनायक जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी पटना का कहना है कि  कोरोना टीकाकरण कराने के प्रति आमजन में उदासीनता बढ़ी है। लगातार दूसरी डोज और प्रिकाशनरी डोज लेने वालों को फोन करने के साथ फोन पर मैसेज भेजा जा रहा है। बावजूद इसके बाद लोग टीकाकरण केंद्र नहीं पहुंच रहे हैं। यदि चौथी लहर आती है तो हाईरिस्क ग्रुप को पूरी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए टीकाकरण जल्द से जल्द अवश्य करा लेना चाहिए।

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