कालाजार और एचआइवी संक्रमित के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने जारी की गाइडलाइन

मुजफ्फरपुर। कालाजार और एचआइवी संक्रमित के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने नई गाइडलाइन जारी की है। पहले बताए गए उपचार में 38 दिनों तक की अवधि में नियत समय के अंतराल पर लाइपोसोमल एंफोटेरिसिन बी (एंबीसोम) के इंजेक्शन को हर दिन लगाना था। नए तरीके में एंबीसोम और ओरल मिल्टेफोसिन के संयोजन का उपयोग किया जाता है।

इसके परिणामस्वरूप बेहतर प्रभावकारिता दर हासिल हुई है। जानकारी के अनुसार कालाजार उन्मूलन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने विसरल लीशमैनियासिस (वीएल) और एचआइवी के सह संक्रमण से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए अपने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

ये नए दिशानिर्देश मेडिसिंस सेंस फ्रंटियर (एमएसएफ) और भागीदारों द्वारा भारत में किए गए एक अध्ययन के परिणामों और दूसरा इथियोपिया में ड्रग्स फार नेगलेक्टेड डिजीज इनीशिएटिव (डीएनडीआइ) और भागीदारों द्वारा किए गए एक अध्ययन के परिणामों पर आधारित है।

कालाजार के नाम से भी ज्ञात विसरल लीशमैनियासिस नामक रोग गर्म देशों में परजीवी से होने वाला एक उपेक्षित रोग है, जो बालू मक्खी द्वारा फैलता है। रोग के कारण बुखार आता है, वजन कम होता है और यदि इलाज किए बिना छोड़ दिया जाए तो यह घातक भी होता है।

स्थानी क्षेत्रों में रहने वाले विसरल लीशमैनियासिस के साथ एचआईवी से प्रभावित लोगों में एचआइवी से अप्रभावित लोगों की तुलना में विसरल लीशमैनियासिस विकसित होने की संभावना 100 से 2,300 गुना अधिक होती है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading