आरा। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष के मध्य आयु की 68.3 फीसद गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। गर्भावस्था में प्रसव पूर्व चार जांच कराना आवश्यक है। जांच नहीं कराना एनीमिया बढ़ने का प्रमुख कारण बन गया है।आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 33.5 फीसद गर्भवती महिलाएं ही प्रसव पूर्व चार जांच कराती हैं। वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 16.1 फीसद ही था। विभागीय प्रयासों और लोगों में जागरूकता के कारण प्रसव पूर्व चार एएनसी जांच में 17.4 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है। लेकिन, सबसे जरूरी बात यह रहती है कि इस दौरान गर्भवती महिलाएं किसी गंभीर रोग की चपेट में न आ जाएं। इन्हीं बीमारियों में से एक है एनीमिया। जिसके कारण न केवल गर्भवती महिलाओं को बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वहीं, कई मामलों में एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान जटिलताएं भी बढ़ जाती है। जिसके कारण अधिक रक्त स्राव से गर्भवतियों की मौत की भी संभावना होती है। एसीएमओ डा. केएन सिन्हा ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को सभी सरकारी अस्पातलों में शिविर का आयोजन किया जाता है।
जिसमें गर्भवती महिलाओं में प्रसव पूर्व नियमित रूप से विभिन्न जांच की जाती है। जिसके आधार पर गर्भवतियों को एनेमिक या गंभीर एनेमिक होने की जानकारी भी दी जाती है। एनेमिक महिलाओं को तीन श्रेणी में रखा जाता है। 10 ग्राम से 10.9 ग्राम खून होने पर माइल्ड एनीमिया, सात ग्राम से 9.9 ग्राम खून होने पर माडरेट एनीमिया एवं सात ग्राम से कम खून होने पर सीवियर एनीमिया होता है।
गर्भवती महिलाओं को सामान्य से अधिक आयरन की जरूरत होती है ताकि बढ़ते शिशु के लिए शरीर में खून बनता रहे। इसलिये आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं और आशा दीदियों के द्वारा सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान की जानकारी दी जाती है। ताकि, एनीमिया के विषय में संपूर्ण जानकारी से प्रसव के दौरान होने वाली मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
