पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दरबार में आम लोगों से मिल उनकी समस्याएं सुनीं। बिहार के अलग-अलग जिलों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री संबंधित विभाग के अधिकारियों और उस विभाग के मंत्रियों को जनता दरबार में रखे थे ताकि फरियाद करने वाले लोगों की समस्याओं का निदान जल्द से जल्द हो। जनता दरबार में सीवान से आए एक युवक ने CM नीतीश कुमार से कहा कि हम आपके जनता दरबार में 2021 में भी आए थे। हाई स्कूल की जमीन बचाने को लेकर आपसे फरियाद किए थे। इसके बाद आपने शिक्षा मंत्री को फोन कर समस्या के समाधान का निर्देश दिया था।
इसके बाद शिक्षा मंत्री ने वहां के डीएम को फोन कर जमीन को खाली कराने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। फरियादी ने कहा कि सर, कोई कार्रवाई तो नहीं ही हुई उल्टे अब जान पर आ पड़ी है। शिकायत सुन नीतीश कुमार ने अधिकारियों से कहा कि यह क्या हो रहा है। फरियादी कह रहा कि वे 2021 में भी आए थे। सरकारी स्कूल के जमीन से कब्जा अब तक नहीं हटा। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
वहीं, जनता के दरबार में सेविका-सहायिका बहाली में गड़बड़ी को लेकर भी कुछ फरियादी पहुंचे थे। CM नीतीश कुमार मामले को ध्यान सुना और अधिकारियों तुरंत तलब कर दिया। बस क्या था मुख्य सचिव आमिर सुबहानी फौरन मुख्यमंत्री के समक्ष हाजिर हुए। फिर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ और सचिव अनुपम कुमार CM के सामने हाजिर हुए। पीछे से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार भी आये। सीएम नीतीश ने कहा कि देखिए आज फिर से कई शिकायत पहुंच गई। इस पर एस. सिद्धार्थ ने कहा कि सर..आज शाम तक फाइल आ जाएगी। अगली बैठक में हो जायेगा। बहुत जल्द हो जाएगा।
इधर, मधेपुरा से आए एक फरियादी ने CM से कहा कि आपके द्वारा मधेपुरा में मेडिकल कॉलेज खोला गया, लेकिन वहां कोई सुविधा नहीं है। न तो बेहतर इलाज की व्यवस्था है और न जांच की। छह माह से अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो रहा। एमआरआई जांच की सुविधा आज तक शुरू ही नहीं हुई।
सिर्फ नाम का मेडिकल कॉलेज है। इस पर, CM ने स्वास्थ्य सचिव की क्लास लगा दी। सीएम नीतीश ने कहा कि यह तो आश्चर्यजनक बात है। वहां कोई सुविधा नहीं है। ऐसा क्यों है? इसको देखिए। मेडिकल कॉलेज खोला जाए और वहां कोई सुविधा ही नहीं मिले।
