खगड़िया के शहीद कैप्टन आनंद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लोग अपनी छतों पर चढ़ गए। मां और भाई पार्थिव शरीर से लिपटकर रो पड़े। पूरे गांव की आंखें नम दिखीं। परबत्ता प्रखंड के अगुवानी गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

कैप्टन आनंद ग्रेनेड विस्फोट में शहीद हो गए थे। आनंद को आर्मी में ऑफिसर बनाने के लिए उनके पिता ने साइकिल तक बेच दी थी। पढ़ाई के लिए सब-कुछ दांव पर लगा दिया था। आनंद बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे।

भागलपुर के टॉपर भी थे
उन्होंने 5 साल की उम्र तक गांव में पढ़ाई की थी। शुरुआती शिक्षा के बाद पिता ने पहले उन्हें भागलपुर में पढ़ाया। फिर बोकारो भेज दिया। पिता मधुकर बताते हैं कि बेटे की पढ़ाई के लिए साइकिल बेचनी पड़ी थी। वो गोलगप्पे पसंद करते थे। वो अपने भाई की पढ़ाई को लेकर कैप्टन कंसर्न थे।

NDA की तैयारी के लिए पिता ने दिल्ली भेजा था
शहीद के पिता ने बताया कि आनंद ने उम्र सीमा से पहले ही NDA की लिखत परीक्षा पास कर लिया था। इस कामयाबी के बाद उन्होंने आनंद को NDA की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया। वहां आनंद ने परीक्षा पास किया। इंटरव्यू पास कर नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बना।7 दिसंबर 2019 को उन्हें प्रमोट कर कैप्टन बनाया गया था। आनंद ने हर जगह कामयाबी का मिसाल कायम किया है। वे 20 दिन पहले ही अपने परिवार के लिए बनाए घर के गृह प्रवेश करने गांव आए थे। 10 जुलाई को ड्यूटी के लिए जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर गए थे।




