सीतामढ़ी में यूरिया के लिए किसानों में हाहाकार मची हुई है। किसान अपने धान की फसल में यूरिया खाद डालने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सीतामढ़ी के किसान एक-एक बोरी खाद के लिए जूझ रहे हैं और तस्कर धड़ल्ले से खाद को नेपाल में भेजकर दोगुना फायदा कमा रहे हैं। वही खाद की किसान सुबह से शाम तक लाइन में खड़े रह रह हैं।

किसानों का कहना है की एक तो सरकारी रेट से ज्यादा में खाद बेची जा रही है। उसमे भी खाद लेने के लिए सुबह से शाम हो जाने के बावजूद नाही मिलता है। तस्कर खाद की बोरियों को साइकिल, ऑटो और मोटरसाइकिल के जरिये नोमैंस लैंड पार करा नेपाल भेज दे रहे हैं। हर रोज हजारों बोरी खाद खुली सीमा से पैदल माथे पर लेकर नेपाल भेजी जा रही है। जिसकी तसवीर भी आई है।

हाल ही में 10दिन पूर्व मेजरगंज बॉर्डर से 1500 बोड़ी खाध जब्त किया गया था। कृषि विभा से मिली जानकारी के अनुसार जिले में एक लाख दस हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 58 हजार हेक्टेयर में खेती हुई है। वही यूरिया की किल्लत बड़ी समस्या बनती जा रही है। किसानों को कालाबाजारी का शिकार होना पड़ रहा है।

कालाबाजारी के संबंध में पूछे जाने पर जिला कृषि पदाधिकारी ब्रजेश कुमार ने बताया की कालाबाजारी जिले के आवंटित खाद से नही हो रही है। अन्य जिला और यूपी से मंगाकर नेपाल भेजा जा रहा है। हालांकि कालाबाजारी की सूचना पर धावा दल के द्वारा कारवाई की जाती है। कालाबाजारी की शिकायत मिलते ही कारवाई होती है। विभाग की ओर से प्रखंड स्तर पर धावा दल का गठन किया गया है। अब तक चार उर्वरक विक्रेताओं पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इफ्को की 700 टन यूरिया खाद विक्रेताओं सहित पैक्सों व बिस्कोमान में उपलब्ध कराई गई है।
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