हरियाणा : भारत की शेरनी कही जाने वाली दंगल स्टाइल में पक्के दांव लगाने में माहिर गीता-बबीता की चचेरी बहन विनेश फौगाट की चोट से रियो आलंपिक फतेह का रोड़ा बना था. बावजूद इसके विनेश ने बेहतर वापिसी करते हुए अपना जलवा दिखाया और कामनवेल्थ गेम्स में एंट्री की है. विरासत में मिली रेसलिंग, ताऊ द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फोगाट व बहन गीता और बबीता से प्रेरणा लेते हुए दांव-पेंच सिखने वाली विनेश फौगाट सेे कामनवेल्थ खेलों में गोल्ड की काफी उम्मीद है. पिछले दो लगातार कामनवेल्थ गेम्स में विनेश ने देश के लिए गोल्ड हासिल किया है. इस बार वह बर्मिंघम में गोल्ड मेडल की हैट्रिक बनाने के इरादे से उतरेंग.

पहलवान विनेश फौगाट 53 किलोग्राम भार वर्ग में बर्मिंघम में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों में एक बार फिर से पूरे देश की नजर रहेगी. विनेश फौगाट वर्ष 2016 के रियो ओलंपिक के क्वाटरफाईनल मुकाबले में चोट लगने के कारण मैच हार गई थी. हालांकि विनेश 2014 और 2018 कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड जीत चुकी हैं. एक बार फिर से विनेश से कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड की हैट्रिक लगाने की आस है. विनेश की सफलता का सफर जारी है और कॉमनवेल्थ गेम्स व एशियन गेम्स दोनों में गोल्ड मेडल जीतने वाली वो भारत की पहली महिला पहलवान हैं. विनेश 18 फरवरी, 2019 को होने वाले लॉरियस वर्ल्ड स्पोट्र्स अवाड्र्स के लिए नामांकित होने वाले पहली भारतीय रेसलर बनी थीं.

चरखी दादरी के गांव बलाली में उनका जन्म 25 अगस्त 1994 को हुआ था. उन्होंने 2019 वल्र्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता और टोक्यो ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं थीं. विनेश फौगाट के कॉमनवेल्थ में जाने से परिजनों व उनके गांव के लोगों में खुशी का माहौल है. कॉमनवेल्थ में विनेश फौगाट के प्रदर्शन पर देश भर के लोगों की निंगाहे रहेंगी, क्योंकि फौगाट बहने बेटियों की समानता को लेकर देश भर में प्रेरणा का स्त्रोत रही हैं. विनेश फौगाट की राष्ट्रीय व अतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों को लेकर भारत सरकार उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन अवॉर्ड व भीम अवार्ड से सम्मानित कर चुकी हैं.

पिता का उठा साया, ताऊ ने संभाला तो किया देश का नाम रोशन
विनेश के पिता की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी, ऐसे में उसके चाचा व द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच महाबीर फौगाट ने विनेश का पालन-पोषण किया तथा उसे अपनी बड़ी बहन गीता व बबीता की तर्ज पर पहलवानी के गुर सिखाएं. विनेश फौगाट ने भी अपने ताऊ व बहनों को निराश नहीं किया. जिसके चलते उसने कॉमनवेल्थ, एशियन, विश्व कुश्ती चैंपियनशीप सहित ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया.

बेटी लगाएगी गोल्ड की हैट्रिक
विनेश के कोच व ताऊ महाबीर फौगाट, मां प्रेमलता व भाई हरविंद्र फौगाट का कहना है कि विनेश फौगाट ने गांव की मिट्टी से इस खेल को शुरू करते हुए अपनी बड़ी बहनों से प्रेरणा लेकर कुश्ती में अपना नाम कमाने के लिए पांच वर्ष की छोटी उम्र में ही कुश्ती का पहलवान बनने का सपना पाल लिया था. उन्होंने कहा कि विनेश ने रियो ओलंपिक की चोंट के बाद अपने खेल में जबरदस्त सुधार किया है तथा कई प्रतियोगिताओं में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतकर वापसी की है. अब उनकी बेटी विनेश कॉमनवेल्थ में फिर से स्वर्ण पदक लाएगी और गोल्ड की हैट्रिक बनाएगी.


