वेटिंग टिकट देने में भी रेलवे का दोहरा मानदंड,पूरा किराया चुकाने के बाद भी बोगी में ठूंस-ठूंसकर रेलवे करा रहा यात्रा

मुजफ्फरपुर। वेटिंग टिकट देने में भी रेलवे दोहरा मानदंड अपना रहा है। पूरा किराया चुकाने के बाद भी स्लीपर कोच में यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर यात्रा करा रहा है। थर्ड एसी कोच का हाल भी स्लीपर कोच से बहुत जुदा नहीं है। वहीं, फर्स्ट व सेकेंड एसी में लिमिट से अधिक वेटिंग टिकट नहीं कटता है।

पूरा किराया चुकाने के बाद भी बोगी में ठूंस-ठूंसकर रेलवे करा रहा यात्रा। - Dainik Bhaskarस्लीपर कोच में जितनी सीटें होती हैं, उससे 40-50 फीसदी तक अधिक वेटिंग टिकट रेलवे काट रहा है। लेकिन, इनमें से 4-5 फीसदी वेटिंग टिकट ही कंफर्म हो पाता है। एसी कोच में तो दो-तीन वेटिंग भी कंफर्म नहीं हो पाता है।

वो भी, यदि पहले से कंफर्म टिकट लिए हुए यात्री अपना टिकट रद्द कराते हैं। बाकी पैसेंजर या तो अपनी यात्रा रद्द करने पर मजबूर होते हैं अथ‌वा बोगी में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर यात्रा करते हैं।

इससे बोगी में पहले से रिजर्वेशन कराए यात्रियों को भी परेशानी होती है। दूसरी ओर, चार्ट बनने के बाद भी आरएसी और वेटिंग लिस्ट में है और ट्रेन के निर्धारित डिपार्चर टाइम से 30 मिनट पहले तक अपना टिकट कैंसिल कराते हैं तो स्लीपर क्लास में 60 रुपए कैंसिलेशन चार्ज लगता है।

जबकि एसी का टिकट रद्द कराने पर 65 रुपए की कटौती कर ही टिकट की राशि रिफंड की जाती है। वेटिंग टिकट काटने से रेलवे को तो जबरदस्त आय हो रही है। लेकिन परेशानी यात्री झेलते हैं।

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