विश्व मच्छर दिवस आज:मच्छर जनित बीमारियाें का इस साल उन्मूलन

आज (20 अगस्त काे) विश्व मच्छर दिवस है। गांव से शहर तक शायद ही काेई ऐसी जगह हाेगी, जहां मच्छर का प्रकोप नहीं हाेगा। मच्छर से कई प्रकार की बीमारियां भी हाेती है। इनमें कालाजार, मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू और चिकेनगुनिया आदि प्रमुख हैं।

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हालांकि, सरकार की ओर से इसके रोकथाम के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि कालाजार जाे बिहार, खासकर मुजफ्फरपुर जिले के लिए, खात्मे की ओर है। सरकार के मानक के अनुसार राज्य में कालाजार का प्रकोप सिर्फ सिवान के गाेरियाकाेठी और सारण के ईसुआपुर प्रखंड में ही है।

कालाजार का प्रकोप मुजफ्फरपुर समेत राज्य में 5.3 प्रतिशत ही है। केंद्र सरकार के मानक के अनुसार 10 हजार की जनसंख्या पर एक से कम मरीज हाेने पर कालाजार का उन्मूलन माना जाता है। एसपीओ डाॅ विनय कुमार शर्मा ने बताया कि मानक से कम केस आने के कारण इस वर्ष राज्य से कालाजार का उन्मूलन हाेने की घोषणा हाे जाएगी।

मलेरिया से भी राज्य में सिर्फ पांच जिले प्रभावित हैं। इनमें कैमूर, गया, नवादा, जमुई, मुंगेर और औरंगाबाद शामिल हैं। डाॅ शर्मा ने बताया कि ये प्रभावित जिले पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र वाले हैं। इसके इलाके झारखंड से लगते हुए हैं। झारखंड में मलेरिया का प्रकोप अधिक हाेने का असर इन जिलों में मलेरिया के अधिक मामलों के रूप में दिखता है।

सरकार कई स्तरों पर उन्मूलन के लिए कर रही काम
एसपीओ डाॅ. शर्मा ने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए हर साल दाे बार दवा का छिड़काव किया जाता है। डेंगू और चिकेनगुनिया मिलने पर भी आसपास के गांवों में दवा छिड़काव हाेता है। इस वर्ष इस बीमारी के उन्मूलन के लिए घर-घर खाेजी अभियान भी चलाया जा रहा है। दाे सप्ताह से अधिक जिन्हें बुखार हाे गया है, उनकी खाेज कर इलाज कराया जा रहा है।

मलेरिया प्रभावित जिले में सरकार की ओर से गरीब लाेगाें काे मच्छरदानी वितरण भी किया जा रहा है। डाॅ. शर्मा ने कहा कि लाेगाें काे छत पर टायर, मिट्टी के बर्तन, कूलर में पानी जमा नहीं हाेने देना चाहिए। पानी यदि जमा रह जाए, ताे उसमें केरोसिन डालना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के बुखार से पीड़ित हाेने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में इन बीमारियाें का इलाज नि:शुल्क उपलब्ध है।

 

 

 

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