मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित और कई दशकों से चचरी का दंश झेल रहे कटरा प्रखंड डुमरी गांव के लोगों ने मंत्री और विधायक के तमाम बड़े बड़े दावे और वादे को एक अनोखा रूप में जवाब दिया है. यहां अपने चंदे के पैसे से ग्रामीणों ने पुल बना डाला. सबसे खास बात कि लोगों ने आपसी सहयोग से इस लोहे के पुल को महज 20 दिन में तैयार कर दिया और खुद ही उद्घाटन भी कर दिया.

मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड के डुमरी गांव की दशा और इस गांव की आबादी करीब 3 हजार के आसपास है. आजादी को 75 साल बीत गए लेकिन इस गांव के लोगों को एक पुल नसीब नहीं हुआ. इस गांव से होकर लखनदेई नदी की धार बहती है तो जब भी बाढ़ की स्थिति उतपन्न होती है तो इस गांव के लोग चिंतित हो उठते हैं. आवागमन में काफी परेशानी होती है खुद से चचरी पुल बनाकर आवागमन करते हैं. चचरी का बना पुल कभी भी ध्वस्त हो जाता है, ऐसे में दशकों से नेता, मंत्रियों और विधायकों से फरियाद लगाते रह गए.

सब जगह से आश्वासन मिला किसी ने पुल नहीं बनवाया तो थक हारकर के अब ग्रामीणों ने खुद चंदा जमा कर पुल बनवाने का काम शुरू कर दिया और महज 20 दिन के भीतर ही ये पुल बनकर तैयार हो गया. इस पुल को भी स्थानीय ग्रामीण ने बिना किसी नेता, मंत्री और विधायक के ही ग्रामीण से ही फीता काट उद्घाटन कर लिया. स्थानीय ग्रामीण मोहम्मद शाहिद ने बताया कि हमलोग सभी के घर-घर जाकर चंदा जुटाए हैं.

करीब 8 लाख रुपये जमा हो गए हैं तो पुल बना. अब इसी लोहे के पुल के सहारे आवागमन करेंगे. लोग कहते हैं कि अब कभी सरकार या किसी नेता मंत्री से फ़रियाद नहीं करेंगे जैसे भी होगा इसी पुल से आवागमन करेंगे. गांव के लोग कहते हैं किसी जनप्रीतिनिधि से एक रुपया भी नहीं लिया गया है. सब ग्रामीणों ने सहयोग दिया है.


