नालंदा के इस महादलित टोले में कोसों दूर है विकास: पक्की सड़क तक नसीब नहीं

नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड क्षेत्र के महादलित टोला शांति नगर के लोग आज भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है। करीब 400 परिवार इस महादलित टोले में 35 वर्षों रह रहें है। जो आज भी पक्की सड़क, नली-गली से मरहूम है।

400 परिवार की आबादी आज भी सरकारी सुविधाओं से है वंचित, पक्की सड़क तक नसीब  नहीं | Development is far away in this Mahadalit Tola of Nalanda - Dainik  Bhaskar

आज भी गांव से निकलने का एक मात्र साधन तालाब की पगडंडी है। इतना ही नहीं यहां के लोग पगडंडी के सहारे अपने दैनिक कार्यो रहे हैं। नल जल की योजना भी इनलोगों को नहीं मिल सका है। महज एक चापाकल से 70 घर के लोग अपनी प्यास बुझा रहे है। उससे भी दुर्गंधयुक्त पानी निकल रहा है। जिसे लोग मजबूरन पीने का काम कर रहे हैं।

गांव का किशोर मंजय कुमार बताता है है कि आज तक इस गांव में किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी गई है। 3 किलोमीटर पैदल चलकर पगडंडियों के सहारे स्कूल जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है कभी कबार तो लोग चलते चलते पगडंडियों से नीचे तालाब में गिर जाते हैं। पीने के लिए एक चापाकल लगाया गया है जिससे गंदा पानी निकलता है। जिसके पानी के सेवन से कई बार लोग बीमार भी पड़ जाते हैं।

पहले यह महादलित टोला ग्राम पंचायत राज बड़ागांव के अंतर्गत आता था। लेकिन अब इसे नगर पंचायत का दर्जा हासिल हो गया है। ग्राम पंचायत रहते हुए तो इस महादलित टोले का विकास नहीं हुआ। गांव के लोग अब यह आस लगा रहे हैं कि शायद अब नगर पंचायत में उनके गांव की तस्वीर बदलेगी।

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