लालू की बेटी बोलीं:कॉलेजियम सिस्टम पर उठाए सवाल, कहा- इसपर जाति विशेष का अधिकार क्यों

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या न्यायपालिका में कॉलेजियम सिस्टम पर लगातार हल्ला बोल रही हैं। राजद ने अपने ऑफिशियल पेज पर कहा है कि- न्यायपालिका में आरक्षण राजद की भी पुरानी मांग रही है। कॉलेजियम सिस्टम खत्म कर अखिल भारतीय न्यायिक सेवा आयोग स्थापित कर प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए जजों की बहाली होनी चाहिए।

Controversial statement of daughter of Lalu Yadav Rohini Acharya she said  accused of girl home scandal is friend of Vikas Man - लालू यादव की बेटी  रोहिणी का विवादित बयान, बालिकागृह कांड

दरअसल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ये मुद्दा उठाया है और उसके बाद देशभर में इस पर बहस तेज हो गई है। स्टालिन ने तमिलनाडु के एक कार्यक्रम में कहा था कि जजों की नियुक्ति में सभी वर्गों के लोगों को भागीदार होना चाहिए।

ट्वीट कर सवाल उठाया रोहिणी ने

रोहिणी आचार्या ने एक के बाद एक किए ट्वीट में लिखा है-‘ कॉलेजियम सिस्टम पर वार करो, मनुवादियों का नाश करो।’ ‘बहुजन समाज को कैसे मिलेगा अधिकार, कॉलेजियम सिस्टम पर है जाति विशेष का अधिकार।’ ‘जब लोकतंत्र हमारा है तब कॉलेजियम सिस्टम के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में मनुवादियों का क्यों कब्जा है।’

‘ग्रुप डी की बहली भी दो चरणों में होती है, फिर कॉलेजियम सिस्टम की बहली एक जाति विशेष एक खानदान की होती है… ‘ ‘जो धारा 370 पर ताल ठोक कर दंभ भरा करते हैं, कॉलेजियम सिस्टम पर फिर क्यों भीगी बिल्ली बन जाते हैं। ‘

लोग केस लेकर कोर्ट नहीं जा रहे बाहर की मामले निपटा रहे

रोहिणी आचार्या ने दिलिप मंडल के ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसमें दिलीप मंडल ने लिखा है-‘ बिल्कुल सही मांग है। जजों में जातीय विविधता न होने के कारण ज्यादातर जातियों का न्यायपालिका से भरोसा उठ गया है। लोग बाहर ही मामले निपटा रहे हैं। केस लेकर कोर्ट जा नहीं रहे हैं।’

बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम वह व्यवस्था है जिसके तहत जज ही जज को चुनते हैं। आरोप लगता रहा है कि एक ही जाति के जज अपने ही बेटे, भतीजे या जाति में से जज चुनते हैं ! इसलिए आरोप लगता रहा है कि तमाम वर्गों का प्रतिनिधित्व न्यायपालिका में गायब है।

जजों की बहाली के नियम जानिए

लोअर कोर्ट में जजों की बहाली की लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की जाती है। इसी के तहत इन कोर्ट के लिए जज बहाल किए जाते हैं। बिहार में हाईकोर्ट, बीपीएससी के जरिए यह परीक्षा आयोजित कराता है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की बहाली कॉलेजियम सिस्टम के तहत होती है। किसी राज्य के हाईकोर्ट में जज की बहाली करनी हो तो वहां के चीफ जस्टिस और दो सीनियर जज मिलकर नाम सुप्रीम कोर्ट को भेजते हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट उस पर अपनी सहमति केन्द्र सरकार को भेजती है और और फिर सरकार उसे राष्ट्रपति को भेजती है। राष्ट्रपति के यहां से नियुक्ति की जाती है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के जज की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सीनियर जज नाम तय कर सरकार को भेजते हैं और सरकार सहमति देते हुए उसे राष्ट्रपति को भेजती है। कॉलेजियम सिस्टम यही है।

आरोप लगता रहा है कि देश भर में 45 ऐसे परिवार हैं जिनके नाते-रिश्तेदार ही जज बनते रहते हैं। प्रतियोगिता परीक्षा से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की बहाली नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं।

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