14 साल की बेटी ने पिता को ब’चाने भालू से भि’ड़ी : 8 मिनट सं’घर्ष के बाद भालू को ला’ठी मा’रकर भ’गाया

राजस्थान के सिरोही जिले में अपने पिता को भा’लू से ल’ड़ते देख एक बेटी ने अपनी जिंदगी दां’व पर लगा दी। उसने भालू का मु’काबला करते हुए पिता को ब’चा लिया। सिरोही के रेवदर कस्बे के सिलदर गांव में सोमवार देर रात एक भालू ने किसान पर ह’मला कर दिया। ह’मला देख कु’त्तों ने शो’र म’चाया तो खेत पर बने मकान में सो रही 14 साल की बेटी जोशना भा’गकर बाहर आई और भालू से भिड़ गई। करीब 7-8 मिनट के संघर्ष के बाद उसने भा’लू को भगा दिया।

पिता को बचाने वाली जोशना डरी हुई जरूर है, लेकिन उसका कहना है कि हिम्मत हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना किया जा सकता है।भालू ने उसके पिता किसान करमा राम चौधरी (50) को बु’री तरह घा’यल कर दिया। भालू ने उनके मुंह को बु’री तरह नोंच डाला है। घायल किसान को गुजरात के मेहसाणा हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया है। हा’दसे के बाद उनकी बेटी जोशना और परिवार स’दमे में है। जोशना ने बताया कि भालू से सं’घर्ष के दौरान मन में एक ही बात थी कि मुझे भले ही कुछ भी हो जाए, लेकिन पिता को कुछ नहीं होने दूंगी।

जोशना ने बताया, ‘मैं अपने माता-पिता के साथ खेत पर थी। रात को पिताजी बाहर खेत में सो रहे थे, मां के पास मैं कमरे में सो रही थी। रात को करीब 3 बजे अ’चानक कुत्तों के भौं’कने से नीं’द खुली। कुछ समझ पाते उसके पहले पिताजी के चि’ल्लाने की आ’वाजें सु’नाई देने लगी। मैं और मां उनकी तरफ दौड़े। वहां का मंजर देख बु’री तरह ड’र गई।

भालू ने पिताजी को चा’रपाई से नीचे गि’रा दिया था और उनके ऊपर बैठकर उनके शरीर को नों’च रहा था। पहले तो ड’र के मा’रे पांव कां’पने लग गए, लेकिन पिताजी को ब’चाने का ख्याल आते ही ए’कदम से दौ’ड़ी ला’ठी उ’ठाकर भा’लू पर ता’बड़तोड़ ह’मले करने शुरू कर दिए। मन में एक ही बात थी कि मुझे कुछ भी हो जाए, लेकिन पिताजी को कुछ नहीं होना चाहिए।’

‘ला’ठी मा’रने पर भा’लू और ज्यादा आ’क्रामक हो गया और हमारी तरफ ल’पका, लेकिन खेत पर अंधेरे के कारण उसको कुछ भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। भालू को हमारी तरफ आते देख मां ने भी प’त्थर फें’कना शुरू किया और मैं ला’ठी लेकर भालू से मु’काबला करती रही। अगर भालू मुझे पकड़ लेता तो शायद में बच नहीं पाती। लेकिन मुझे मेरे पिता को बचाना था, इसलिए दूसरा रास्ता नहीं था।

भालू मेरी तरफ ल’पकता और लाठी के हमले से फिर पीछे हट जाता। 7-8 मिनट के संघर्ष के बाद भालू वहां से भाग गया। इसके बाद मैंने चाचा को फोन किया तो वह मौके पर आए और पिताजी को जसवंतपुरा अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक इलाज के बाद उनको मेहसाणा (गुजरात) के अस्पताल रे’फर कर दिया।

सोशल मीडिया पर जोशना की तारीफ हो रही है। उन्हें बहादुरी के लिए पुरस्कार देने की भी मांग लोग कर रहे हैं। जोशना 8वीं तक पढ़ी हैं और उसके बाद खेत से स्कूल की दूरी ज्यादा होने के कारण पढ़ाई छोड़ दी। उदयपुर के अनिल रोजर्स (वन्यजीव संरक्षणकर्ता) एवं लक्ष्मण पारंगी के मुताबिक भालू ख’तरे के समय ज्यादा आ’क्रामक हो जाता है। शि’कार छूट भी जाए तो फिर पकड़ लेता है। व्यक्ति अकेला हो तो बचना मुश्किल होता है। वह सिर पर पहले अ’टैक करता है। एक वार ही अधमरा कर देता है। भालू आंख पर चोट लगने पर संभवत: पीछे हट सकता है।

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