पितरों को मोक्ष दिलाने वाला गया का विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला -2022 शुरू हो गया है। आज से त्रिपाक्षिक पिंडदान शुरू होगा। इसके लिए मोक्षनगरी सज धज कर तैया है। मेले में आने वालों के स्वागत के लिए सभी प्रकार की तैयारी हो चुकी है। नौ सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेले का समापन 25 सितंबर को होगा। राजकीय मेले में देश-विदेश से आने वाले पिंडदानियों के स्वागत को मोक्षधाम विष्णुनगरी सज-धज कर तैयार है। जिला प्रशासन से लेकर गयापालों ने अपनी तैयारी को अंजाम दिया।

त्रिपाक्षिक पिंडदान करने वाले पहुंचे त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वाले अधिकतर पिंडदानी शनिवार की रात तक गयाधाम पहुंच चुके हैं। देर रात तक 10 हजार से पिंडदानी यहां पहुंच चुके हैं। इनमें अधिकतर हरियाणा और राजस्थान के मारवाड़ी समाज के हैं। पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए ये पिंडदानी भाद्रपद्र चतुदर्शी यानी शुक्रवार से त्रिपाक्षिक कर्मकांड शुरू करेंगे।

पिंडदानी पटना जिले के पुनपुन नदी के घाट से स्नान कर कर्मकांड की शुरुआत करेंगे। जो तीर्थयात्री पुनपुन घाट नहीं जा पाएंगे व गया शहर के गोदावरी तालाब से पिंडदान कर 21 कुलों का उद्धार करेंगे।

लगातार गया पंचकोस की विभिन्न वेदियों पर पिंडदान करते-करते आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी 26 सितंबर को कर्मकांड का समापन करेंगे। त्रिपाक्षिक के अलावा मुख्य रूप से एक दिन, तीन, पांच और सात दिनों तक गयाश्राद्ध करने वाले पिंडदानियों का आना शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। अगले तीन-चार दिनों में पिंडदानियों की भारी भीड़ होगी।

पिंडदानियों की अगवानी के लिए गयापाल तैयार
पूर्वजों की मोक्ष की कामना लिए गयाधाम आने वाले लाखों पिंडदानियों की आगवानी को विष्णुपद से लेकर गयाधाम के पंडे तक तैयार हैं। होटल व धर्मशालाकों के अलावा उनके आवासन स्थलों पर 17 दिनी कर्मकांड करने वाले पिंडदानी पहुंच चुके हैं। पितृपक्ष पखवारे में उनके यहां पिंडदानियों की आवाजाही का सिलसिला अंतिम दिन तक जारी रहेगा। श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विह्वल, सचिव गजाधर लाल पाठक व सदस्य महेश लाल गुपुत ने कहा कि त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध करने वाले अधिकतर तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को पुनपुन घाट या गोदावरी से त्रिपाक्षिक पिंडदान की शुरुआत करेंगे।

विष्णुपद क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त
पितृपक्ष मेला को लेकर विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ बनाया गया है। इस बार वीआईपी पास नियम समाप्त किये जाने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था को और सुव्यवस्थित किया गया है। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र से पहले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र निर्धारित किये गए है।

इस प्रतिबंधित क्षेत्रो से आम तीर्थयात्रियो सहित वीआईपी श्रेणी के तीर्थयात्री भी सामान्य रूप से मंदिर क्षेत्र में पैदल ही जायेंगे। ऐसी स्थिति में वीआईपी श्रेणी के तीर्थ यात्रियों का वाहन पड़ाव के लिए बंगाली आश्रम व चांद चौरा स्थल का चयन किया गया। ये लोग इन वाहन पड़ाव पर अपने वाहनो को लगाएंगे। पैदल चलने से लाचार व जरूरतमंदो को मंदिर क्षेत्र जाने के लिए टोटो की उपलब्ध सुविधा रहेगी।

फल्गु में उमड़ेगा पिंडदानियों का सैलाब
भाद्रपद पूर्णिमा शनिवार को दिन फल्गु और देवघाट पर पिंडदान को तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ होगी। अहले सुबह से तीर्थयात्रियों का जत्था मोक्षदायिनी पहुंचेगा। डैम बनने के बाद पानी होने से पिंडदानियों को स्नान व तर्पण करने में काफी सहूलियत होगी। आश्विन कृष्णपक्ष प्रतिपदा यानी रविवार को शहर से सात किलोमीटर दूर स्थित प्रेतशिला में पिंडदानियों का जत्था जुटेगा। प्रेतशिला वेदी के अलावा इसी दिन ब्रह्मकुंड, रामकुंड व रामशिला वेदी पर पिंडदान होगा। त्रिपाक्षिक पिंडदान करने वाले अंतिम दिन 26 सितंबर को गायत्री घाट पर नाना-नानी के लिए कर्मकांड के साथ गयाश्राद्ध संपन्न करेंगे।

