भागलपुर के इस अस्पताल में धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन, गर्भवती महिलाएं परेशान!

जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को कम करने समेत अन्य मरीजों को सुविधा देने के लिए भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित अनुमंडल अस्पताल को 10 लाख रुपए से ज्यादा की अल्ट्रासाउंड मशीन दी गई. इस मशीन को ऑपरेट करने के लिए वहीं की एक महिला चिकित्सक को 15 दिनों का ट्रेनिंग भी दिया गया, लेकिन बमुश्किल से इन वर्षों में 15 से 20 गर्भवती महिलाओं का ही यहां अल्ट्रासाउंड हो पाया. मशीन ऑपरेट करने के लिए जिस महिला चिकित्सक को प्रशिक्षण दिया गया था, कुछ ही दिनों के बाद उनका यहां से तबादला हो गया. इसके बाद यह मशीन लगभग एक साल से अस्पताल के एक कमरे में धूल फांक रहा है.

यहां आने वाले मरीज अल्ट्रासाउंड मशीन वाले कमरे के गेट पर लटक रहे ताले को देखकर लौट जाते हैं और मोटा रकम खर्च कर निजी अस्पतालों के अल्ट्रासाउंड सेंटरों में जाकर टेस्ट करवाते हैं. इससे इस इलाके के मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है. जबकि इन 2 वर्षों में भी स्वास्थ्य विभाग अब तक अल्ट्रासाउंड ऑपरेट करने के लिए किसी चिकित्सक को तैयार नहीं कर पाया है.

मरीजों को नहीं मिल पा रहा इलाज
प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत हर जिले में हर माह शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं की सभी प्रकार की जांच करने का प्रावधान किया गया है. लेकिन जब नवगछिया अनुमंडल की महिलाएं यहां आती हैं, तो इन्हें खासतौर से अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पाती है. इस कारण जो महिलाएं आर्थिक रूप से थोड़ी ठीक होती हैं, वह तो बाहर जाकर रुपए खर्च कर अल्ट्रासाउंड करवा लेती हैं. लेकिन जिनके पास रुपए नहीं होते हैं वह बिना टेस्ट कराए ही रह जाती हैं. इससे उन जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मी बताते हैं कि अल्ट्रासाउंड को चालू रखने को लेकर प्रशासन सजग नहीं है, क्योंकि खुद यहीं के कुछ डॉक्टरों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संरक्षण में अनुमंडल अस्पताल के समीप ही कई सारे अल्ट्रासाउंड सेंटर व क्लिनिक फल-फूल रहे हैं.

अनुमंडलीय अस्पताल में कई पद खाली
इस अनुमंडलीय अस्पताल में डॉक्टर समेत नर्सिंग स्टाफ का कई पद खाली है. इनमें फार्मासिस्ट, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, जीएनएम और चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पद शामिल हैं. जबकि (ब्लड स्टोरेज यूनिट की भी कमी है.

अस्पताल में संसाधनों की कमी
इस मामले में नवगछिया अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ.अरुण कुमार सिन्हा कहते हैं कि हाल में ही अस्पताल का निरीक्षण हुआ था. तब सिविल सर्जन और कमिश्नर को अस्पताल की सुविधाओं की कमियों के बारे में बताया गया था.सिविल सर्जन ने कहा था कि डेट फिक्स कर पीजी डिग्रीधारी महिला चिकित्सक को भागलपुर में 15 दिनों का ट्रेनिंग दिलाया जाएगा.

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