मुंगेर:शारदीय नवरात्र में दस दिनों तक मां दुर्गा की अराधना के बाद दशमी तिथि (दशहारा) के दिन मां की विदाई करने की परंपरा है. इस दौरान पंडालों में स्थापित दुर्गा मां की पूजाकर स्थापित मूर्ति का विसर्जन किया जाता है. यहां मां की प्रतिमा विसर्जन के लिए ठीकरा (मां के बैठने की जगह) बनाई जाती है, जिसे 32 लोग उठाते हैं, जो कंहार जाति के होते हैं. इस साल 45 किलोग्राम चांदी से ठीकरा बनाया गया है.

दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन का तरीका ही अनोखा
मुंगेर में इस अनोखे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. बुजुर्ग लोगों का कहना है कि यह काफी दिनों से यहां होता आ रहा है जो अब परंपरा बना गया है और इस परंपरा का निर्वहन आज की पूजा समितियां भी कर रही है.





