ड़कों का टूटा होना और उस पर कीचड़ फैला रहना आम बात है. बिहार के हर जिले में ऐसी सड़कें अमूमन देखने को मिल जाती हैं. ऐसे में होने वाली परेशानियों पर भिनभिनाते-बुदबुदाते हुए भी लोग ऐसी सड़कों पर सालोंभर चलते रहते हैं. लेकिन, अब जब छठ का महापर्व सामने है तो कीचड़ भरी सड़क पर छठव्रती कैसे पवित्रता के साथ घाट पर जा पाएंगे- इस चिंता से हनुमाननगर प्रखंड के गोढ़ियारी पंचायत के लोग परेशान हैं.
बता दें कि कई लोग मन्नत पूरी होने के बाद वर्षों तक दंडप्रणामी देते हुए अपने घर से छठ घाट पर जाते हैं. फिलहाल यहां की सड़कों की दशा बहुत बुरी है. नतीजा है कि दंडवत देते हुए अपने घर से छठ घाट तक जाने वाले व्रतियों को कीचड़ भरी सड़क पर ही दंडवत करते हुए जाना होगा. लोक आस्था के महापर्व छठ के मौके पर भी स्थानीय प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है.
जर्जर सड़क में साल दर साल बनते गए हैं गड्ढ़े
हनुमान नगर प्रखंड क्षेत्र के गोढ़ियारी पंचायत की रहनेवाली ललिता देवी बताती हैं कि उनके गांव से घाट को जानेवाली सड़क की स्थिति काफी खराब है. इस सड़क में अनगिनत गड्ढ़े बन चुके हैं. लेकिन न तो सड़क की मरम्मत की गई न ही दोबारा बनाई गई. अब इन गड्ढों में बारिश के कारण कीचड़ हो गया है. इस कीचड़ से गुजर कर ही व्रतियों को छठ घाट तक जाना होगा, यह सोच-सोचकर हम सब परेशान हैं. राह कितना भी कठिन क्यों न हो, व्रत करते हैं तो घाट पर तो किसी भी तरह से पहुंचेंगे ही, लेकिन दंडप्रणामी देनेवाले कैसे कीचड़ में लेटकर जाएंगे यह बात परेशान करने वाली है.
न जनप्रतिनिधि न पदाधिकारी का ध्यान
यहां के ग्रामीण बताते हैं कि जर्जर सड़क की मरम्मत कराने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर स्थानीय बीडीओ तक से गुजारिश की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता है. यहां रहनेवाले अनिल कुमार सिंह बताते हैं कि खुद उन्होंने कई बार हनुमाननगर प्रखंड के बीडीओ से लेकर सड़क निर्माण विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक इसकी मौखिक और लिखित शिकायत की है. सभी जगहों से सिर्फ आश्वासन ही मिला. शिकायत करते-करते अब हम थक चुके हैं. दुर्घटना के कारण पिछली बार एक व्यक्ति गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. उस समय मरम्मत करने के लिए विभाग ने कहीं-कहीं ईंट का टुकड़ा गिरा दिया, लेकिन ठीक से मरम्मत नहीं की गई.
जर्जर सड़क पर आए दिन दुर्घटना
इस पंचायत के रहनेवाले सुधीर कुमार के मुताबिक, यह रोड अब इतना जर्जर हो चुका है कि इस पर सिर्फ मवेशी ही चल पाते हैं. लोग तो 20 की स्पीड में भी ठीक से बाइक नहीं चला पाते हैं. नजर इधर-उधर होती नहीं कि बाइक सवार गिरकर चोटिल हो जाते हैं. सुधीर कुमार बताते हैं कि यह सड़क कई इलाके के गांवों को जोड़ती है. सड़क काफी महत्त्वपूर्ण है. लोगों का आवागमन भी खूब होता था. लेकिन सड़क की जर्जर स्थिति के कारण वाहन चालक दूसरे रास्ते से जाना सुरक्षित समझते हैं.


