सीवान में पहली बार किसानों ने किया तंबाकू की खेती, जानें कम लागत में कितना होगा मुनाफा

बिहार के सीवान जिले में किसान कृषि कार्यो में अब काफी रुचि ले रहे हैं. किसान पारम्परिक खेती के इतर अब नगदी फसलों की खेती करने लगे हैं. जिससे किसानों को मुनाफा भी हो रहा है. पूर्व में जिले के किसान धान, गेंहू, मक्का, बाजरा, अरहर, सरसो सहित अन्य फसलों का उत्पादन कर जीविका चलाते थे. इससे बचत सीमित हीं हो पाता था. हालांकि बदलते समय के अनुसार किसानों ने अपने आप में भी परिवर्तन लाया है और समय की मांग के अनुसार नगदी फसलों का उत्पादन कर मुनाफा कमा रहे हैं. जिले के महराजगंज में 5 किसान संयुक्त रूप से मिलकर तीन बीघे में तंबाकू की खेती कर रहे है. वहीं प्रयोग के तौर पर पिछली बार किसानों ने तंबाकू की खेती की थी. सफलता हाथ लगने पर इस बार 3 बीघे में लगभग 80 हजार रुपए की लागत से खेती शुरू की है. सब कुछ ठीक ठाक रहा तो 3 लाख तक मुनाफा हो जाएगा.

तम्बाकू की उन्नत खेती की जानकारी | Tobacco farming in hindi - Kheti Kisani  ◊ Agriculture, Gardening, Organic Farming Tips to Grow More

मुजफ्फरपुर से लाया गया पौधा
जिले के महाराजगंज में 5 किसानों के द्वारा तंबाकू की खेती करने के लिए उसके पौधे मुजफ्फरपुर से मंगाए गए हैं. जिसकी रोपाई खेत तैयार कर दी गई है. रोपाई करने के 3 महीने के बाद है तंबाकू तैयार हो जाएगा. जिसकी कटाई कर धूप में सुखाने के बाद बाजारों में बेचने के लिए भेज दिया जाएगा.

क्या कहते हैं किसान
महराजगंज के रहने वाले किसान अब्दुल हफीज ने बताया कि मुजफ्फरपुर बीज और पौधा मंगाकर पांच किसान खेती कर रहे हैं. तम्बाकू की खेती सभी प्रकार की मिट्टी पर संभव नहीं है. यह केवल बलुई मिट्टी पर ही किया जा सकता है. इस बार महाराजगंज में बलुई मिट्टी पर 3 बीघा में खेती की गई है. जिसमे 80 हजार रुपए खर्च हुए हैं. वहीं यह फसल तीन माह में तैयार हो जाएगा. जिसको बाजार में बेचने पर लगभग 3 लाख तक का आमदनी होगी. उन्होंने आगे बताया कि पहली बार बड़े पैमाने पर तम्बाकू की खेती कर रहे हैं.पिछले वर्ष में प्रयोग के रूप में तंबाकू की खेती कर जांच की गई थी. जिसकी पैदावार की स्थिति बेहतर होने पर इस बार इसकी खेती की गई है. हालांकि इस पर किसी भी प्रकार की सब्सिडी प्राप्त नहीं हुई है.

सबसे उन्नत किस्म होता है निकोटिना टुवैकम
भारत में सबसे ज्यादा इस प्रजाति के किस्मों की खेती की जाती है. इसके पौधे लम्बे, पत्तियां बड़ी व फूल का रंग गुलाबी होता है. इस किस्म के प्रजाति का उपयोग सिगरेट, सिगार, हुक्का और बीडी बनाने में ज्यादा उपयोग किया जाता है. साथ ही निकोटीना टुवैकम प्रजाति की तम्बुओं को चबाने में भी प्रयोग किया जाता है. निकोटीना टुवैकम प्रजाति उन्नत किस्म इस प्रकार है – टाइप-23, टाइप-49, टाइप-238, एमपी-220, फर्रुखाबाद लोकल, पटुवा, मोतिहारी, कलकतिया, पीएन-28, एनपीएस-219, पटियाली, सी-302 आदि शामिल है.

जानिए इतिहास
बता दें कि भारत में 17वीं सदी में पुर्तगाल के लोगों ने इसे यहां परिचित कराया था. वर्ष 1776 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नकदी फसल के तौर पर इसे उगाना शुरू किया था और इसे घरेलू उपभोग और विदेशी व्यापार के लिए इस्तेमाल किया जाता था. भारत में करीब 0.24 फीसदी या 4.93 हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर तंबाकू का उत्पादन किया जाता है. देश में एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल होने के कारण इसे स्वर्णिम पत्ती भी कहा जाता है, भारत के 15 राज्यों में कम से कम 10 प्रकार की तंबाकू बोई जाती है और इसका उत्पादन किया जाता है.

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