बिहार: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में जिस नए स्कूली पाठ्यक्रम को लागू करने की तैयारी हो रही है उसमें बच्चों के संपूर्ण विकास पर फोकस किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 से नए स्कूली पाठ्यक्रम लागू होंगे। शिक्षा विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि नए पाठ्यक्रम में केंद्र सरकार ने बच्चों पर किताबों और पढ़ाई का बोझ कम करने का फैसला किया है।
शारीरिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों पर बढ़ावा
इससे स्कूलों में बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी और शारीरिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका लाभ राज्य के सभी 72 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले एक करोड़ 42 लाख बच्चों को मिलेगा। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद या फिर संपूर्ण विकास के लिए जरूरी दूसरी गतिविधियों में शामिल होने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।

नवंबर से स्कूलों में बजेगी खेल की घंटी
शिक्षा विभाग द्वारा नवंबर से बच्चों को सप्ताह में एक दिन नो बैग की सुविधा दी जाएगी यानी उस दिन बच्चे बिना किताबों के थैले के स्कूल आएंगे और खेलकूद गतिविधियों में भाग लेंगे। छठ के बाद सभी सरकारी विद्यालयों में खेल की घंटी अनिवार्य रूप से लगेगी।
अगले दो वर्षों में स्कूली फ्रेमवर्क में बच्चों के संपूर्ण विकास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इसी के तहत बच्चों को खेलकूद के लिए ज्यादा से ज्यादा फ्री टाइम मिलेगा। नए पाठ्यक्रम को तैयार करने में बच्चे को किस स्तर (स्टेज) पर क्या और कितनी सामग्री पढ़ानी है, उसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। किसी भी विषय के कितने चैप्टर होंगे और परीक्षा का पैटर्न क्या होगा, ऐसी सारी चीजें फ्रेमवर्क में शामिल होंगी।




