मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड अंतर्गत रामपुर दयाल गांव के ‘डीह टोला’ निवासी चंदन झा पिछले 5 वर्षों से दंड प्रणाम देते हुए घर से छठ घाट जाते हैं. वह उड़ीसा के राउरकेला में एक फैक्ट्री में काम करते हैं. जबकि वह हर साल छठ में अपने गांव आते हैं. चंदन बताते हैं कि उनका बेटा सोनू जन्म के समय कई तरह की बीमारियों से घिरा था. डॉक्टर के कहने पर बेटे को 5 महीने तक आईसीयू में रखा गया.मेरे बच्चे की बचने की उम्मीद बहुत कम थी, तभी छठी मईया से मन्नत मांगी. अगर मेरे बेटे की जान बज जाएगी तो दंड प्रणाम देते हुए छठ घाट जाऊंगा. इसके बाद से मैं यह हर साल कर रहा हूं.
चंदन के गांव रामपुर दयाल के वार्ड संख्या 10 डीह टोला से छठ माई का घाट तकरीबन 6 किलोमीटर दूर है. वह यह दूरी को लेट कर उठते हुए दंड प्रणाम की मुद्रा में तय करते हैं.
जानें पूरी कहानी
चंदन बताते हैं कि मेरे बेटे की जान छठी माई की भीख है. इसलिए छठी मैया के लिए अपार आस्था है. जब तक कर सकूंगा तब तक दंड प्रणाम देते हुए छठ माई के घाट जाऊंगा. आगे चंदन कहते हैं कि इस जगत को चलाने वाली केवल छठी मैया है. व्रत में रहकर दंड देकर छठ माई के घाट जाता हूं, लेकिन मुझे किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. मुझे स्वयं छठी माई शक्ति प्रदान करती है.

जब डॉक्टर ने छोड़ी आस तो छठी माई ने दी जिंदगी
चंदन झा पिछले 5 साल से दंड प्रणाम करते हुए छठ माई के घाट जा रहे है. चंदन के पिता कमल किशोर झा बताते हैं कि छठी माई की दया से बड़ी मुश्किल से एक पोता हुआ. जन्म के दौरान शुरुआती दिनों में बहुत बीमार था. छठी माई के कृपा से ही पोता की जान बची. तब से मेरा बेटा चंदन दंड प्रणाम कर के छठ माई के घाट जाता है. चंदन को दंड प्रणाम देते हुए घाट जाते यह पांचवा साल है. अब मेरा पोता सोनू 5 साल का हो गया है, सोनू भी हमारे साथ घाट जाकर छठ माई का आशीर्वाद लेता है.

