बिहार के मुजफ्फरपुर सहित आस-पास के इलाके में डेंगू का कहर जारी है. यहां 100 से अधिक मरीज डेंगू से पीड़ित हैं. जो सरकारी से लेकर निजी क्लीनिक में इलाज करवा रहे हैं. बढ़ते डेंगू से पीड़ित मरीजों के बीच कीवी और पपीता का डिमांड तो हैं ही. इसके साथ हीं बकरी के दूध की डिमांड बहुत अधिक बढ़ गई है. कहा जाता है कि बकरी का दूध पिलाने से डेंगू पीड़ितों का प्लेटलेट बढ़ने लगता है. मरीजों के लिए बकरी का दूध ढूंढना भी एक बड़ी समस्या है. पशुपालक चाह कर भी सभी मरीजों की मदद नहीं कर सकते क्योंकि बकरी का दूध बहुत कम मात्रा में होता है. मरीज के परिजनों को दूध की उपलब्धता को लेकर परेशानी झेलनी पड़ती है.
बकरी का दूध ढूंढने दूर दराज से आते हैं लोग
मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत नरौली गांव के पशु पालक इम्तियाज बताते हैं कि बकरी का दूध खोजने लोग दूर – दूर से आते है. डेंगू की बीमारी में बकरी का दूध फायदा पहुंचता है, इसलिए मरीज के घर वाले बकरी के दूध की तलाश करते है. आगे बताया कि बकरी से दूध बहुत कम मात्रा में मिल पाता है, इसलिए चाह कर भी सभी मरीजों की मांग को पूरा नहीं कर पाते है. हालांकि जहां तक संभव हो पाता है लोगों की मदद करते है.
50 रुपए में बिकता है 250 ग्राम बकरी का दूध
इम्तियाज ने बताया कि एक बकरी से 250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक ही दूध उपलब्ध हो पाता है. इसलिए इसकी कीमत भी अधिक है. 50 रुपए में 250 ग्राम के हिसाब से दूध बिकता है. जरूरत और डिमांड बढ़ने पर लोग मनमाना कीमत भी वसूलते है. नरौली गांव में तकरीबन 30 घर में बकरी पालन का काम होता है. ज्यादातर तो बकरी का दूध उसके मेमने के लिए ही रहने देते हैं. इसी बीच कोई मरीज का घरवाला बकरी का दूध मांगने आ गया तो थोड़ा उन्हें दे देते है.
दूध के लिए रोज पहुंचते हैं मरीज के परिजन
डेंगू से पीड़ित मरीज जो शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है वह गांव की ओर रुख कर रहे है. मुजफ्फरपुर में डेंगू के बढ़ते मरीजों की संख्या को लेकर बकरी पालकों के पास रोज लोग आ रहे है. ग्रामीण हर संभव मदद के लिए तैयार रहते हैं. जिनसे जो चल बनता है पीड़ितों को दूध देकर मदद करते हैं.



