नेपाल से आए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगे गिद्ध से मचा ह’ड़कंप! हुआ अहम खु’लासा

पड़ोसी देश नेपाल के नेशनल पार्क से गिद्ध को रिचार्ज के ख्याल से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाकर गिद्ध को छोड़ा गया था. बता दें कि गिद्ध पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगा मिलने के बाद तरह तरह के चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था.

 उन्होंने बताया कि गिद्ध वैसी सभी चीजों को पचा जाता है जिसे इंसान या कोई दूसरा जानवर आसानी से नहीं पचा पाता. ऐसे में हमारे अलग-बगल के कई जानवरों और इंसानों के लिए खतरा हो सकता है. गिद्ध उसे अपना निवाला बना लेता है और वातावरण को दूषित होने से बचा लेता है. इसे बचाने के लिए देशभर में कई प्रोजेक्ट भी काम कर रहे हैं.वन विभाग के DFO सुधीर कुमार गुप्ता ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जब इसकी जानकारी नेपाल सरकार से साझा की गई तब यह स्पष्ट हो गया कि यह गिद्ध नेपाल के नेशनल पार्क से छोड़ा गया था. इसके ऊपर रीचार्जेबल कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस लगाए गए थे; ताकि गिद्ध के सभी प्रकार में मूवमेंट पर नजर रखी जाए. उन्होंने बताया कि वरीय आधिकारिक के अलावा वर्ल्ड लाइफ के तरफ से मिली गाइडलाइन के तहत होगी और आगे की कार्रवाई अब की जायेगी. तत्काल गिद्ध को सुरक्षित रखने का प्रबंध किया जा रहा है.

वेटनरी चिकित्सक राजीव रंजन ने बताया कि गिद्ध के स्वास्थ्य का पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है और उसके खाने पीने का भी इंतजाम किया गया है. अब गिद्ध के पास किसी भी इंसान को जाने से रोक दिया गया है ताकि गिद्ध बिना भय और डरे सहमे रह सके. उन्होंने बताया कि गिद्ध को तत्काल ऐसे वातावरण में रखने की व्यवस्था की जा रही है जो उसके अनुकूल हो.

चिकित्सक ने आगे बताया की गिद्ध की प्रजातियां कितनी है इसकी सही जानकारी तो नहीं, लेकिन इसकी संख्या में काफी कमी आई है. ऐसे में रिसर्च का यह भी एक कारण हो सकता है कि आखिर क्यों अचानक गिद्धों की संख्या में कमी आई है.उन्होंने अहम् बातें बताते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण के लिए गिद्ध न सिर्फ जरूरी है; बल्कि गिद्ध की कमी के कारण ही वर्तमान में कई तरह की महामारियों का जन्म भी हो रहा है.

उन्होंने बताया कि गिद्ध वैसी सभी चीजों को पचा जाता है जिसे इंसान या कोई दूसरा जानवर आसानी से नहीं पचा पाता. ऐसे में हमारे अलग-बगल के कई जानवरों और इंसानों के लिए खतरा हो सकता है. गिद्ध उसे अपना निवाला बना लेता है और वातावरण को दूषित होने से बचा लेता है. इसे बचाने के लिए देशभर में कई प्रोजेक्ट भी काम कर रहे हैं.

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