इन शहरों में सांस लेना भी मुश्किल,प्रदूषण से बचने का समुचित उपाय करने की जरूरत

पटना :  बात प्रदूषण की होती है तो सबसे पहले देश की राजधानी की चर्चा होती है। लेकिन इस बार बिहार के कुछ शहरों ने प्रदूषण के मामले में दिल्‍ली को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में प्रदूषण की मार लगातार बढ़ती जा रही है। गुरुवार को प्रदेश के कई शहरों में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया।

गुरुवार की सुबह मोति‍हारी राज्य का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा। वहां पर एयर क्वालिटी सूचकांक 435 (AQI 435) रिकार्ड किया गया। दूसरे स्थान पर पूर्णिया रहा, वहां पर AQI 414 दर्ज किया गया। सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में बेतिया देश में तीसरे स्थान पर रहा, वहां 402 एक्यूआई रिकार्ड किया गया।

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार घोष का कहना है की बिहार का प्रदूषण मौसम जनित है । वातावरण में नमी और धूलकण की मात्रा अधिक होने के कारण प्रदेश के कई शहर प्रदूषण की चपेट में आ गए हैं।

प्रमुख प्रदूषित शहरों के अलावा सिवान में एक्‍यूआइ 84, छपरा में 315, दरभंगा में 358, सहरसा में 377, बेगूसराय में 362 एवं कटिहार में 400 दर्ज किया गया। पटना में 288 एवं मुजफ्फरपुर में 255 एक्‍यूआइ रहा।

राज्य में होने वाले प्रदूषण में एक महत्वपूर्ण कारक वाहनों से निकलने वाला धुआं भी है । विशेषज्ञ का कहना है कि‍ अगर सरकार समुचित करवाई करें तो वाहन जनित प्रदूषण को बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा समय-समय पर सड़कों पर पानी का छिड़काव कराना जरूरी है ता‍कि धूल उड़ने से रोका जा सके।

भवन के निर्माण में भी प्रदूषण मानकों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। हर भवन ग्रीन नेट के अंदर ही बनाना चाहिए परंतु देखा जा रहा है की अधिकांश भवनों का निर्माण बिना ग्रीन नेट के हो रहा है।

बिल्डिंग मटेरियल सड़कों पर रखे और फेंके जा रहे हैं। इसमें गिट्टी, बालू ,सीमेंट से काफी प्रदूषण फैल रहा है। प्रदूषित हवा के चपेट में आने से लोग कई बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं।

पीएमसीएच के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर अशोक कुमार का कहना है की प्रदूषण के कारण एलर्जी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी से बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शिकार हो रहे हैं। ऐसे में लोगों को प्रदूषण से बचने का समुचित उपाय करने की जरूरत है।

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