पटना : राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार के समय उर्दू शिक्षक से लेकर दारोगा-सिपाही तक, जिन 10 हजार से ज्यादा लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, उन्हीं को दोबारा नियुक्ति पत्र बांटने की बाजीगरी से नीतीश कुमार बेरोजगारों की आंख में धूल झोंक रहे हैँ।
उन्होंने कहा कि गांधी मैदान में कभी गिलास से रुमाल और खाली बर्तन से कबूतर निकालने की बाजीगरी दिखाने वाले जममा लगाते थे। आज वहीं नीतीश कुमार फूंक मार कर हजारों नियुक्ति पत्र निकाल दे रहे हैं।
मोदी ने कहा कि जिन 10,459 लोगों को दरोगा-सिपाही के पद पर नियुक्ति पत्र दिए गए, उन्हें एक साल पहले जनवरी में ही संबंधित जोन के एसपी-डीआइजी नियुक्ति पत्र दे चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा के लोग जब बिना प्रशिक्षण पूरा किए पूरी वर्दी नहीं पहन सकते, तब नियुक्ति पत्र लेते समय वे वर्दी में कैसे दिखें। यह पहली बार हुआ।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और तेजस्वी प्रसाद यादव को उन नियुक्तियों के पत्र बांट कर श्रेय लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं, जिनकी प्रक्रिया नौ अगस्त को सरकार बदलने से पहले शुरू हो चुकी थी।
मोदी ने कहा कि महागठबंधन सरकार की पहली कैबिनेट में पहले दस्तखत से 10 लाख युवाओं को “स्थायी नौकरी” देने का जो वादा किया गया था, उसका समय तो अभी तक शुरू ही नहीं हुआ।
क्या वे कैबिनेट की सौ बैठकों के बाद गिनती शुरू करेंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार नई नौकरियां देने में जीरो और भाजपा काल की नौकरियों का क्रेडिट लेने में हीरो की तरह एक्टिंग कर रही है।
उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार पिछले दो महीनों से एनडीए काल की नौकरियों के सहारे, जिस तरह से अपना चेहरा चमकाने की कोशिश कर रही है, उससे साबित होता है कि जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए किसी भी हद को पार कर सकती है।
