पटना : केंद्रीय चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति को लेकर जनता दल यूनाइटेड ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। बिहार सरकार के वित्त मंत्री एवं जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का इस मामले में दस्तावेज तलब करना अपने आप में सब कुछ साफ कर देता है।
विजय चौधरी ने कहा कि जस्टिस केएम जोसेफ के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा अरुण गोयल को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए जाने संबंधी दस्तावेज तलब किया है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी घटना है और स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।
विजय चौधरी ने कहा कि वास्तव में आनन-फानन में जिस ढंग से गोयल समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेते हैं एवं उन्हें तत्काल मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया जाता है, यह पारदर्शी एवं उचित प्रक्रिया नहीं हो सकती है।
उन्होंने कहा कि आम तौर पर अदालतें किसी मामले में सरकार को हलफनामा या शपथ पत्र दायर करने के लिए कहती है। क्योंकि सरकार पर भरोसा रहता है। लेकिन, इस बार मामला आगे बढ़ गया।
विजय चौधरी ने कहा कि गोयल के मामले पूरी चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज को तलब करना बड़ी घटना है। इसका मतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पहली नजर में पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक मान लिया है। चौधरी ने कहा कि पूर्व में भी केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादाओं को ध्वस्त किया जाता रहा है।
जदयू नेता ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग आम बात हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे में संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बरकरार रखने एवं प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा उठाया गया यह कदम स्वागत योग्य है।
देश की जनता उच्चतम न्यायालय की तरफ आशा भरी नजरों से देख रही है। मंत्री ने कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार सत्ता में बने रहने के इकलौते लक्ष्य के साथ काम कर रही है। इससे देश की संविधान, परम्परा एवं संस्कृति का अहित हो रहा है।



