नालंदा के सदर अस्पताल में डॉक्टरों के गायब रहने या देर से आने की शिकायत आम है। इसी क्रम में इमरजेंसी में डॉक्टर के नहीं रहने की सूचना जब सिविल सर्जन को मिली तो निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंच गए। इमरजेंसी में डॉक्टर को न देखकर भड़क गए। उन्होंने डॉक्टरों से साफ कह दिया कि यदि रोस्टर के अनुसार ड्यूटी नहीं करनी है तो घर पर बैठें। प्लीज गो होम, डोंट डिस्टर्ब अस।
सदर अस्पताल की स्वस्थ्य व्यवस्था को लेकर कई दिनों से प्रबंधन व डॉक्टरों के बीच तनातनी बनी हुई है। सोमवार को निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन को एसएनसीयू में एक महिला चिकित्सक मिली जिनकी ड्यूटी ओपीडी में भी लगाई गई थी। उनके साथ भी सीएस के साथ बहस हुई। सीएस अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि सदर अस्पताल में इन दिनों डॉक्टर ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। एक भी डॉक्टर रोस्टर के अनुसार ड्यूटी नहीं कर रहे हैं।
आए दिन कभी ओपीडी तो कभी इमरजेंसी से डॉक्टर के गायब रहने की शिकायत मिल रही है। स्थिति यह बन गई है कि डॉक्टर बिना आवेदन के ही गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा अगर मनमानी ही करनी है तो घर पर बैठें। सिस्टम भी कहने वाला नहीं हैं।

लेकिन जब उपस्थिति बनेगी तो ड्यूटी तो लिया जाएगा। फटकार लगाते हुए कहा कि इससे ज्यादा डॉक्टर किसी सरकारी अस्पताल में नहीं हैं। यहां 30 डॉक्टर हैं। ड्यूटी नहीं करनी है तो घर बैठकर प्रैक्टिस कीजिए। कौन सा रोस्टर का पालन करती हैं। प्लीज गो होम, डोंट डिस्टर्ब अस। कोई कितना बर्दाश्त करेगा।
चिकित्सकों की ड्यूटी को लेकर दिनभर सदर अस्पताल में गरमा गर्मी का माहौल बना रहा। चिकित्सक की अनुपस्थिति पर सीएस जमकर बरसे। सीएस कार्यालय में जमकर बहस चली। एक महिला डॉक्टर को भी खरी खोटी सुनाई।

उन्होंने कहा कि सिस्टम के विरुद्ध कोई भी काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महिला डॉक्टर ने भी एक डॉक्टर पर फोटो खींचने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमलोगों को अनावश्यक परेशान किया जाता है।
रोस्टर को लेकर सदर अस्पताल में हमेशा सवाल खड़ा होता आया है। रोस्टर के अनुसार ड्यूटी नहीं करने के कारण कभी इमरजेंसी तो कभी ओपीडी खाली रहती है। कारवाई भी आधी अधूरी होती है। जिसका परिणाम है कि चिकित्सकों की मनमानी बढ़ती ही जा रही है। सीएस का कहना है कि डॉक्टर ड्यूटी नहीं करेंगे तो इस तरह की समस्या बनी रहेगी।


