मुजफ्फरपुर जिले में सदर अस्पताल पूरी तरह से कुप्रबंधन का शिकार है। यहां पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। मातृ-शिशु अस्पताल में सोमवार की शाम पांच बजे मझौली खेतल की रोशनी खातून इलाज के लिए आईं। प्रसव पीड़ा से वह बेचैन थी।
स्वजन करीब नौ बजे तक इलाज की गुहार लगाते रहे। वहां तैनात एएनएम इलाज के बदले उसको यह जवाब दे रही थीं कि चिकित्सक नहीं है तो दवा नहीं मिलेगी। उसके बाद स्वजन ने कहा कि इमरजेंसी में सरकारी अस्पताल में चिकित्सक रहते हैं। जब मरीज की हालत खराब होने लगी तो स्वजन वहां से एक निजी अस्पताल के लिए निकल गए।
मरीज के परिजनों का आरोप था कि सरकार गरीब के इलाज की बात करती है, लेकिन यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है। यहां पर अपने स्वजन का इलाज करा रही रूबी ने कहा कि प्रबंधक से शिकायत करने पर कोई फायदा नहीं होने वाला। यहां पर रात में जो भी गर्भवती आ रहीं, उनको बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।
यहां पर एएनएम रहतीं, लेकिन महिला चिकित्सक नहीं रहने से इलाज नहीं हो रहा है। वहीं, जेनरल वार्ड में इलाजरत मरीज को बाहर से दवा मंगाकर इलाज कराना पड़ रहा है। वार्ड में इलाजरत रोशनी ने बताया कि वह बुधवार को यहां भर्ती हुईं। एपेंडिक्स का ऑपरेशन शुक्रवार को किया गया जो कि काफी सफल रहा। अब वह टहल रही हैं। बाहर से 900 रुपये की दवा खरीद कर लानी पड़ी है।
सिविल सर्जन डा.यूसी शर्मा ने बताया कि बिना इलाज मरीज को बाहर का रास्ता दिखाना और भर्ती मरीज को दवा नहीं देना गंभीर मामला है। प्रबंधक के बारे में आए दिन शिकायत मिल रही है। प्रबंधक के खिलाफ कार्यपालक निदेशक व प्रधान सचिव को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सीएस ने कहा कि रोस्टर लागू नहीं हो रहा है।
सदर अस्पताल परिसर में बच्चे को लेकर मां भटकती रही। वहां के कर्मी कभी आउटडोर व कभी इमरजेंसी में भेजते रहे। उसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं था। थक-हार कर जीविका हेल्प लाइन के पास पहुंची। वहां पर तैनात जीविका दीदी शहजादी खातून ने उसकी समस्या के बारे में जानकारी ली।
दामोदरपुर से अपने बेटे आरव के इलाज के लिए आई मां ने बताया कि बच्चे का हाथ जल गया है। वह एक बजे यहां आई। उस समय बताया गया कि पर्ची नहीं कटेगी। उसके बाद वह इधर उधर भटकती रही। कोई सुधि नहीं ले रहा था।
जीविका हेल्पलाइन से शहजादी खातून सुरक्षा प्रहरी प्रभारी पीएन सिंह के सहयोग से बच्चे को लेकर इमरजेंसी में पहुंची। वहां पर बाकी सुरक्षा प्रहरी भी बच्चे के इलाज के लिए पहुंच गए। उसके बाद स्वास्थ्य कर्मी भी सक्रिय हुए। बच्चे का इलाज हुआ तथा दवा भी मिली। इधर, सीएएस ने जीविका दीदी व सुरक्षा प्रहरियों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि मरीज की सेवा में लापरवाही बरतने वाले पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
