पटना : दु’ष्कर्म के मामलों में अ’पराधियों को सजा दिलाने के लिए सबूत का बड़ा महत्व है। दु’ष्कर्म पी’ड़िता के कपड़ों या घ’टनास्थल से सही तरीके से सबूत जमा न हो पाने का फा’यदा आ’रोपियों को मिलता था लेकिन अब पुलिस यौ’न अ’पराधों से जुड़े मामले में सा’क्ष्य जमा करने के लिए वि’शेष कि’ट का उ’पयोग करेगी।
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौ’न हिं’सा व दु’ष्कर्म के मामलों के निष्पादन के लिए वैज्ञानिक व तकनीकी जांच पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए राज्य के 98 पुलिस अनुमंडलों को यौ’न अ’पराध से जुड़े साक्ष्य जमा करने के लिए विशेष किट उपलब्ध कराए गए हैं। यह कि’ट गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यू’रो की ओर से उपलब्ध कराया गया है।
किट का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इसको लेकर सभी अनुमंडलों में क्षेत्रवार पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
दरअसल, दुष्कर्म के मामलों में अपराधियों को सजा दिलाने के लिए साक्ष्य का बड़ा महत्व है। दुष्कर्म पीड़िता के कपड़ों या घ’टनास्थल से सही तरीके से सबूत जमा न हो पाने के केस में अ’पराधी कई बार बच निकलते थे। ऐसे में साक्ष्य के संकलन पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।
अब बिहार पुलिस को विशेष किट और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है। किट में बॉक्स, माइक्रोस्कोप स्लाइड, प्लास्टिक बैग समेत एक दर्जन से अधिक तरीके के उपकरण हैं, जिसके जरिए ब्लड सैंपल, सिमेन जैसे साक्ष्य वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा किए जा सकेंगे, जिन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा। इन साक्ष्यों और रिपोर्ट का इस्तेमाल आरोपितों को सजा दिलाने में होगा।
राज्य के 98 पुलिस अनुमंडलों में विशेष किट के इस्तेमाल को लेकर एक महीने से प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। मगध क्षेत्र के 15, शाहाबाद क्षेत्र के 12, तिरहुत क्षेत्र के 11 और सारण क्षेत्र के छह पदाधिकारियों को दिसंबर में प्रशिक्षण दिया गया।
इस महीने जनवरी में मिथिला क्षेत्र, पूर्णिया क्षेत्र और भागलपुर क्षेत्र के पुलिस पदाधिकारियों को अब तक प्रशिक्षण मिल चुका है। पटना समेत अन्य क्षेत्रों के पदाधिकारियों को भी जल्द प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे अनुसंधान में सहयोग मिलेगा।

