मुजफ्फरपुर : आज के ही दिन हमें हमारा संविधान मिला था. वह संविधान जो पिछले 73 वर्षों से हमारे देश में समानता और न्याय की भावनाओं को जिंदा रखे हुए है.

हम जब इस संविधान के निर्माण की बात करते हैं, तो डॉ आंबेडकर और डॉ राजेंद्र प्रसाद जैसे गिने-चुने नाम ही जुबां पर आते हैं, लेकिन इस संविधान को तैयार करने में 299 लोगों की एक बड़ी टीम थी, जिसे अलग-अलग राज्यों से चुन कर भेजा गया था.
तत्कालीन बिहार, जिसमें झारखंड भी शामिल था, से इस टीम में 36 लोग थे. इनमें अकेले पटना जिले से पांच सदस्य का चुनाव हुआ था. दूसरे नंबर पर मुजफ्फरपुर आता है, जहां से चार सदस्य चुने गये थे.
मुंगेर से तीन तो सारण, दरभंगा व औरंगाबाद से दो दो सदस्य का चुनाव हुआ था. वैसे 36 में से ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जिनका नाम भी आज लोगों को याद नहीं है.
संविधान तैयार करते वक्त एक-एक मसले पर जोरदार बहस करनेवाले टीके साह हों या फिर दलित आदिवासी मसले पर बोलनेवाले जयपाल सिंह मुंडा आज किसी को कोई याद नहीं है. बिहार के इन संविधान निर्माताओं की बड़ी भूमिका रही है.



