मुजफ्फरपुर: कलाकारों का जीवंत अभिनय, कथा और निर्देशन ने दर्शकों को मुग्ध कर दिया। जिला स्कूल में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य मेला में भोपाल के नया थियेटर टीम की ओर से राजरक्त नाटक की प्रस्तुति आकृति रंग संस्थान की ओर से दी गई।
पद्मश्री निरंजन गोस्वामी, पूर्व एलआइसी के सीनियर डीएम सुनील कुमार, डॉ. एके दास, डा. अरुण साह, संजय मयंक, आकृति रंग संस्थान के मनोज कुमार वर्मा और रामचंद्र सिंह ने दीपजला कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मो. इश्तेयाक व सुनील फेकनिया, वीरेन नंदा, हेमनारायण विश्वकर्मा, राजसत्ता और धर्म में संघर्ष की रानी की भूमिका निभाई।

संजय मयंक, संतोष सारंग मुख्य रूप से मौजूद रहे। राजरक्त के माध्यम से कलाकरों ने राजसत्ता और धर्म के संघर्ष को बखूबी प्रस्तुत किया।
कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी विसर्जन पर आधारित इस नाटक में बलि प्रथा का विरोध किया गया है। कहानी के अनुसार राजा ने राज्य में पशु बलि पर रोक लगा दी, लेकिन पुरोहित इससे सहमत नहीं था। हालांकि अंत में पुरोहित को बलि प्रथा रोकनी पड़ी।

नाटक का निर्देशन पद्मभूषण हबीब तनवीर का था। इसका संयोजन रामचंद्र सिंह ने किया था। नाटक में रामचंद्र सिंह ने पुरोहित, मोहित मैना ने गोविंद माणिक, सवर्णा रावत ने किया। वहीं त्रिपुरा के अंतिम राजा के किरदार में गोविंद मणिक और पुरोहित रघुपति के अभिनय ने दर्शकों का दिल जित लिया ।



