बेतिया: टीबी की बीमारी का अगर समय पर पहचान हो जाए तो लोग टीबी से आसानी से लड़ाई जीत सकते हैं। यह कहना है जिले के यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्रा का। मंगलवार को उन्होंने बताया कि आमतौर पर देखा जाता है कि लोग 2 हफ्ते से ज्यादा बलगम वाली खांसी, बुखार से पीड़ित होते हुए भी टीबी की जांच नहीं कराते हैं। जब उनकी मुश्किलें बढ़नी शुरू हो जाती है तब वे अस्पताल का रुख करते हैं।
ऐसे में जरूरी है कि लक्षणों को नजरअंदाज न करते हुए तुरंत सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच कराएं। इससे टीबी की सही समय पर आसानी से पहचान हो जाती औऱ दवाओं के सेवन से यह खत्म हो जाती है। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ चंद्रा ने बताया कि टीबी की बीमारी लाइलाज नहीं है। जिले के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में टीबी के मरीजों की जांच तथा इलाज उपलब्ध है।
दवा की पूरी कोर्स का सेवन करना है जरूरी
केएचपीटी की जिला प्रतिनिधि मेनका सिंह ने बताया कि टीबी रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति घर या बाहर खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रमण बाहर निकलता है। जो हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। ऐसे में घर के लोग संक्रमित न हो इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए। मुंह पर मास्क जरूर लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि लोग भूलवश ये गलतियां कर बैठते हैं कि आराम होने पर पूरा कोर्स किए बिना ही दवा बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे दवा छोड़ने से बीच में ही टीबी लौट सकता है। वहीं मरीज को एमडीआर टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है। मेनका सिंह ने बताया कि बुखार के साथ ही भूख में कमी और वजन कम होना आदि लक्षण दिखे तो तुरंत टीबी की जांच कराएं। टीबी रोग की समस्त जांच और दवाइयां सरकार की तरफ से अस्पताल में मुफ्त हैं।
निक्षय योजना का मिलता है लाभ
सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत सरकार द्वारा टीबी से ग्रसित लोगों के लिए प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ताकि टीबी मरीज पौष्टिक आहार का सेवन करें।