मुंगेर: मुंगेर के जाने माने विद्वान ज्योतिषाचार्य ब्रजेश मिश्रा ने अक्षय तृतीया को लेकर कई अहम जानकारी विस्तार से साझा किया है. 23 अप्रैल को प्रातः 8:14 तक तृतीया तिथि विद्यमान है. वाराणसी और मिथिला पंचांग के अनुसार 23 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया व्रत मनाने का विधान स्पष्ट उल्लेखित है. अक्षय तृतीया अपने आप में एक स्वयं सिद्ध तिथि के साथ एक मुहूर्त है. इसे अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं अर्थात अक्षय तृतीया के दिन किसी भी कार्य को करने के लिए किसी मुहूर्त इत्यादि की आवश्यकता नहीं होती.
ज्योतिषाचार्य ने बताया यह अक्षय फल देने वाली तिथि है. यूं तो साधारण तैयार किए गए सभी कर्मों के पुण्य आप अपने समयानुसार भोग प्रदान कर क्षीण हो जाते हैं. परंतु अक्षय तृतीया के दिन किए गए पाप अथवा पुण्य कभी नष्ट नहीं होते हैं. जन्म जन्मांतर तक अपना फल देने में सामर्थ्यवान रहते हैं. अक्षय तृतीया के दिन से ही त्रेतायुग आदि का प्रादुर्भाव हुआ था और अक्षय तृतीया के दिन ही हयग्रीव भगवान की जयंती भी मनाते हैं. इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन से ही भगवान श्री बद्रीनारायण, केदारनाथ सहित चार धामों के कपाट खोले जाते हैं और यात्रा प्रारंभ होती है.
अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम की भी होती है पूजा
ज्योतिषाचार्य ब्रजेश मिश्रा ने बताया कि इस शुभ दिन भगवान परशुराम ने महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका देवी के घर जन्म लिया था. भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है. इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम की पूजा करने का भी विधान है.
सनातन धर्म में महाभारत को पांचवें वेद के रूप में माना जाता है. महर्षि वेदव्यास ने अक्षय तृतीया के दिन से ही महाभारत लिखना शुरू किया था. महाभारत में ही श्रीमद्भागवत गीता समाहित है और अक्षय तृतीया के दिन गीता का पाठ करना शुभ माना जाता है.
अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान से पाप होता है नष्ट
अक्षय तृतीया के दिन ही स्वर्ग से पृथ्वी पर माता गंगा अवतरित हुई थी. माता गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कराने के लिए राजा भागीरथ में हजारों वर्ष तक तपस्या की थी. मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. अक्षय तृतीया के दिन माता अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है. माता अन्नपूर्णा की पूजा करने से भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन गरीबों को भोजन कराने का विधान है. साथ ही देश भर में भंडारे भी कराए जाते हैं.
स्वर्ण खरीदने के साथ दान-पुण्य करना भी है महत्वपूर्ण
ज्योतिषाचार्य ब्रजेश मिश्रा ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन जरूरतमंदों को दान पुण्य करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. अक्षय तृतीया के दिन वैदिक ब्राह्मण को घर बुलाकर आदर पूर्वक भोजन अवश्य कराना चाहिए. ये काम गृहस्थ लोग अवश्य करें. इससे धन धान्य में अक्षय वृद्धि होती है. अपनी धन संपत्ति में कई गुना इजाफा पाने के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्सा इस दिन दान करना चाहिए. इस दिन स्वर्ण खरीदना शुभ माना गया है.
अक्षय तृतीया के दिन दान करने के लिए जल युक्त घड़ा, ग्रीष्मकालीन अनाज, ऋतु फल, वस्त्र, पंखा इत्यादि अवश्य दान करने चाहिए. दान करने से जीवन से दुर्गति का नाश होता है. इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण का पूजन करने से वर्ष भर संपन्नता बनी रहती है. इस दिन किसी भी तरह के कार्य को करने के लिए कोई पंचांग निर्धारण की आवश्यकता नहीं है. इस दिन ही महाभारत के युद्ध का अंत माना जाता है. इसलिए कई मायनों में अक्षय तृतीया महत्वपूर्ण है. हिंदुओं के प्रमुख पर्वों में एक अक्षय तृतीया अपने नाम के अनुसार ही अक्षय फल देने वाली है.