तीन माह में कमाए डेढ़ लाख रुपये: सब्जी की खेती के लिए कचरे से बना रहे जैविक खाद

पश्चिम चम्पारण: स्थानीय पंचायत के बभनौली गांव निवासी मोटर साह भूमिहीन मजदूर हैं। जमीन के नाम पर इनके पास सिर्फ घराड़ी है। एक वर्ष पहले इनका मुख्य पेशा मजदूरी था। मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते थे। परिवार की आजीविका के लिए अन्य प्रदेशों में जाकर भी मजदूरी करते थे। तीन बेटियों के पिता मोटर साह मेहनत मजदूरी कर एक बेटी की शादी कर चुके हैं। इनकी जिंदगी में परिवर्तन की कहानी एक वर्ष पूर्व लिखी गई। वे गोपालपुर थाने के घोघा गांव में अपने रिश्तेदार नथुनी साह के यहां गए थे। नथुनी साह मिश्रित सब्जी की खेती करते हैं। उनकी खेती और आमदनी देखकर मोटर साह ने भी सब्जी की खेती करने का निर्णय लिया। हालांकि, खेती के लिए जमीन नहीं होने के कारण परेशान थे। पंचायत के उप मुखिया धनंजय कुमार ने अपनी चार कट्ठा भूमि इन्हें सब्जी की खेती करने के लिए दी। चूंकि उप मुखिया की वह भूमि बेकार पड़ी हुई थी।

तीन माह में कमाए डेढ़ लाख रुपये सब्जी की खेती के लिए कचरे से बना रहे जैविक  खाद एक साल में बदल गई जिंदगी - income of family has changed with cultivationमोटर साह और उनकी पत्नी छठिया देवी का परिश्रम रंग लाया। सिर्फ कद्दू की खेती कर महज चार माह में मोटर साह ने करीब 50 हजार रुपये कमाए। इनके परिश्रम और उन्नतशील खेती को देखकर एसएसबी के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुमित कुमार ने सब्जी में दवा के छिड़काव के लिए एक स्प्रे मशीन भी पुरस्कार स्वरूप दी थी। मोटर साह ने बताया कि सब्जी की खेती की प्रेरणा उनके गोपालपुर थाने के घोघा गांव निवासी रिश्ते में साढ़ू नथुनी साह से मिली। पहले वर्ष में बीज एवं खेती करने की विधि भी नथुनी साह ने ही बताई।

खरीद ली पांच कट्ठा रेहन जमीन

मोहन साह ने बताया कि उप मुखिया धनंजय कुमार ने अगर जमीन नहीं दी होती तो सब्जी की खेती मैं आरंभ नहीं कर पाता। चार कट्ठे खेत में कद्दू और नेनुआ की खेती करने में 18 से 20 हजार की लागत आई है। महज तीन महीने में एक से डेढ़ लाख रुपये की कमाई हुई है, जिससे पांच कट्ठा जमीन रेहन लिया है। अगले वर्ष उस भूमि में भी सब्जी की खेती करने की योजना है। चार कट्ठा भूमि में लगे कद्दू में प्रतिदिन 90 से 100 कद्दू निकलता है। गांव और आसपास के लोग ही खेत में आकर खरीदकर ले जाते हैं। बेचने के लिए भी कोई टेंशन नहीं रहता।

लोगों के घरों के कचरे का खेती में उपयोग

बता दें कि मोटर साह पंचायत में स्वच्छता कर्मी का काम भी करते हैं। सुबह छह से आठ बजे तक गांव में डोर टू डोर जाकर कचरा उठाने का काम करते हैं। लोगों के घरों से निकले कचरे की छंटनी कर लेते हैं। उसमें से खाद के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले कचरे को अलग कर अपने खेत में लाकर रख लेते हैं, जिससे सब्जी की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है। मोटर साह ने बताया कि गांव के नाले के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करते हैं। नाले के पानी व कचरे से बने जैविक खाद की वजह से उत्पादन अधिक हो रहा है।उप मुखिया धनंजय कुमार ने बताया कि इनको कृषि विभाग की ओर से आर्थिक सहयोग दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading