रामविलास की जयंती पर चाचा-भतीजा करेंगे शक्ति प्रदर्शन

पटना: पद्म भूषण से सम्मानित एलजेपी संस्थापक रहे रामविलास पासवान की आज 77वीं जयंती है. आज का दिन एलजेपीआर और आरएलजेपी के लिए बेहद खास है. ऐसे में दोनों दलों की ओर से राजधानी पटना समेत बिहार के अलग-अलग जगहों पर समारोह का आयोजन किया जा रहा है. चाचा पारस पटना में रामविलास की जयंती मनाएंगे तो भतीजा चिराग हाजीपुर में जयंती मनाएंगे. रामविलास पासवान का जो सपना था, वह सपना कहीं ना कहीं आज टूट गया है. एक घर में दो जगह पर रामविलास की जयंती मनाई जा रही है.

Thumbnail imageपासवान के निधन के बाद परिवार में कलह

रामविलास अपने जीवन काल में अपने परिवार को एकजुट रखा था. परिवार के सभी लोगों के लिए सोचते थे लेकिन आज चिराग पासवान हाजीपुर में अपने पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान का जयंती समारोह मनाएंगे. तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस पटना में रामविलास के जयंती पर याद करेंगे. सबसे बड़ी बात है कि रामविलास पासवान के रहते लोक जनशक्ति पार्टी के पूरी कमान रामविलास पासवान के पास थी लेकिन उनके निधन के बाद आज वर्चस्व की लड़ाई में पार्टी दो भागों में बंट गई.चाचा-भतीजे में छत्तीस का आंकड़ा

आज स्थिति ऐसी है कि चाचा-भतीजा एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते हैं. लगातार एक-दूसरे पर हमलावर रहते हैं. वर्चस्व की लड़ाई में रामविलास की जयंती चाचा भतीजा की तरफ से मनाई जा रही है. दमखम के साथ अपनी जिम्मेदारी भी लोगों को दिखाई जाएगी. रामविलास की जयंती को लेकर पटना से लेकर हाजीपुर तक पोस्टर से पाट दिया गया है. पोस्टर में भी दोनों गुटों की तरफ से लगाया गया है.

एलजेपी में दो फाड़

सबसे खास बात है कि रामविलास पासवान जीवित रहते हुए पार्टी की पूरी कमान चिराग पासवान को सौंप दी थी लेकिन शायद यह बात चाचा पशुपति पारस को रास नहीं आई. यही वजह थी कि रामविलास के निधन के बाद पारस पार्टी को कब्जे में लेकर पार्टी के सांसद को भी एकजुट करने में कामयाब रहे और चिराग पासवान अकेले हो गए. उसके बाद पार्टी की लड़ाई शुरू हुई और अब लोक जनशक्ति पार्टी दो भागों में बंट चुकी है.

हाजीपुर सीट पर होगी जोर-आजमाइश

पिछले कुछ समय से ये बात भी सामने आ रही है कि चिराग पासवान इस बार हाजीपुर से चुनाव लड़ेंगे. इस सीट से अभी पारस सांसद हैं, जबकि रामविलास पासवान इसी सीट से 8 बार सांसद रह चुके हैं. हाजीपुर से अगर चिराग चुनाव लड़ते हैं तो चाचा-भतीजा के बीच विवाद और गहरा सकता है. दोनों एनडीए में रहते हैं तो यह भी दिलचस्प होगा कि कौन वहां से उम्मीदवार होगा.

रामविलास पासवान की 77वीं जयंती

रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी में हुआ था. उनके पिता का नाम जामुन पासवान और माता का नाम सिया देवी है. उनका निधन 8 अक्टूबर 2020 को लंबी बीमारी के बाद 74 वर्ष की उम्र में हो गया था.

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