यही हाल रहा तो बिहार में ठप हो जाएगा मनरेगा, ग्रामीण विकास विभाग ने केंद्र को दो पत्र भेजा

बिहार : करीब सालभर के अंदर बिहार में दूसरी बार मनरेगा के तहत विभिन्न प्रकार के कार्यों में लगे बिहार के श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान बंद है। यह स्थिति केन्द्र सरकार की बेरुखी के कारण पैदा हुई है। शत प्रतिशत केन्द्र के पैसे से चलने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में राज्य को पैसा नहीं मिलने से पिछले साल भी मजदरी भुगतान करीब 150 दिन लंबित था। अब फिर यही हाल है। सवा महीने से अधिक समय से श्रमिक काम तो कर रहे हैं लेकिन पैसा के अभाव में उन्हें मजूदरी नहीं दी जा रही है।

झारखंड में मनरेगा में इन पदों के लिए निकली है वेकैंसी, इस तरह करें आवेदन |  Jharkhand sarkari jobs 2021 manrega jobs for these posts know how to apply  and all detailsविभागीय जानकारी के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष में केन्द्र सरकार ने बिहार को 17 करोड़ मानव दिवस की स्वीकृति दी है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत श्रमिकों को काम मुहैया कराने के लिए 2023-24 में करीब 2132 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार ने दिये थे। बिहार को करीब 17 करोड़ मानव दिवस सृजित करने की स्वीकृति के साथ यह राशि दी गई थी, लेकिन जुलाई तक ही बिहार में करीब 12 करोड़ मानव दिवस सृजित हो गए हैं। अंतिम बार 26 जुलाई को मजदूरी मद में राशि जारी की गई, जिसके बाद इस मद में कोई राशि नहीं बची है। 9 अगस्त तक ही श्रमिकों का मजदूरी बकाया करीब 800 करोड़ तक पहुंच गया है।

ग्रामीण विकास विभाग ने केंद्र सरकार को राशि मुहैया कराने के लिए दो बार पत्र भेजा है। देखना यह है कि केन्द्र राशि कब देता है। पैसा आने के बाद पहले बकाया राशि का भुगतान होगा, फिर नये काम मनरेगा में लिये जाएंगे। पैसा नहीं होने से श्रमिक भी अब मनरेगा के कामों में रुचि नहीं ले रहे हैं। पिछले माह तक जहां रोजाना 8 से 9 लाख श्रमिक रोज काम कर रहे थे। अब एक तिहाई यानी 3 लाख मजदूर ही काम कर रहे हैं। मजदूरों की उदासीनता का यही आलम रहा तो और पैसे नहीं आए तो मनरेगा के काम बंद होने का खतरा पैदा हो जाएगा।

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