भागलपुर: भागलपुर के कई धरोहर सिर्फ यादों में सिमट कर रह गई है. यूँ कहें तो भागलपुर में कई ऐसे धरोहर हैं जिनको लोग अभी तक भी नहीं जानते हैं. कई ऐसे धरोहर है जिस पर सैलानियों का जत्था उमड़ता है. लोग सैंडिस कंपाउंड, लाजपत पार्क, कुप्पाघाट सहित कई धरोहर ऐसे हैं, जिस पर लोग घूमने के लिए जाते हैं. लेकिन आज हम जिस धरोहर की बात करने जा रहे हैं वह भागलपुर के पहले जिलाधिकारी से जुड़ी धरोहर है.
भागलपुर अपने अंदर कई इतिहास को समेटे हुए हैं. उसमें ही एक है भागलपुर के पहले जिलाधिकारी जेम्स बर्टन के बेटे एडवर्ड का कब्र है. 1778 ईस्वी में भागलपुर के जिलाधिकारी जेम्स बर्टन हुआ करते थे. उनका दूसरा पुत्र एडवर्ड की मृत्यु मात्र 6 दिनों में हो गई थी. अभी भी बहुत से लोगों को ना तो उन जिलाधिकारी के बारे में पता है और ना ही उनके बेटे के कब्र के बारे में. हम आपको बता दें कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के समीप टिल्ला कोठी पर जिलाधिकारी का घर हुआ करता था. उनके दूसरे बेटे एडवर्ड की मृत्यु 13 सितंबर 1778 में हुई थी. उस समय वह मात्र 6 दिनों का था. जिसके बाद अपने घर के पीछे यानी टिल्ला कोठी के नीचे उन्हें दफन कर दिया गया और वहां कब्र बनाया गया. लेकिन अब वह कब्र जीर्ण तीर्ण अवस्था में है.स्थानीय ने बताया हमलोगों को पता नहीं यह क्या
स्थानीय लोगों की माने तो अभी भी वहां पर कुछ विदेशी सैलानी घूमने आते हैं. उस कब्र को देखने जरूर पहुंचते हैं. हालांकि कब्र के ऊपर जंगल हो गया है. जिस वजह से बहुत से लोगों को उसकी जानकारी नहीं मिल पाती है. स्थानीय लोगों ने बताया कि हमलोगों को पता नहीं यह क्या है. लेकिन लोग यहां आकर इसे देखते हैं. इसकी तस्वीर भी लेते हैं. साथ ही बच्चों के बीच चॉकलेट भी बांटते हैं. जिला प्रशासन को ऐसे इतिहास को संयोजन की जरूरत है.