6 बार डिजाइन फेल, फिर भी नहीं मानी हार, IIT से ली मदद; अब बिहार के लाल ने बनाया गजब का स्कूटर

पटना : कहते हैं कि आवश्कता ही आविष्कार की जननी होती है. इस कहावत को पटना के अभिमन्यु ने चरितार्थ किया है. इंजीनियरिंग करने के बाद किसी कंपनी में नौकरी करने के बजाए अभिमन्यु ने खुद की कंपनी खोल ली और चार साल की मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने वागा मोटर्स का इलेक्ट्रिक तीन पहिया स्कूटर बना डाला है. इसका इस्तेमाल कॉलेज कैंपस, चिड़ियाघर, टूरिस्ट प्लेस, बिजनेस पार्क, हाउसिंग काम्प्लेक्स, स्मार्ट सिटीज जैसे जगहों पर हो सकता है. कुछ टूरिस्ट प्लेस जैसे ताजमहल, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, काशी विश्वनाथ धाम जैसे जगहों पर जहां पेट्रोल और सीएनजी सहित सभी प्रकार की गाड़ियां बैन होती हैं. वहां इस स्कूटर को रेंटल सर्विस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा माइक्रो मोबिलिटी के लिए यह एक शानदार वाहन है. बता दें कि यह स्कूटर बैट्री से ऑपरेट होता है.अभिमन्यु ने बताया कि इंजीनियरिंग करने का मसकद ही उनका अपनी खुद की कंपनी खोलना था. कंपनी के लिए मार्केट स्टडी के दौरान उनको यह ख्याल आया कि एक ऐसा वाहन बनाया जा सकता है, जो कम दूरी को तय करने के लिए कारगर हो. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी कंपनी वागा मोटर्स के पहले प्रोडक्ट तीन पहिया इलेक्ट्रिक स्कूटर पर काम शुरू किया. वर्ष 2019 से 2023 तक चार साल लगातर मंथन किया. छह बार डिजाइन फेल हुआ और इसके बाद तमाम बदलाव करते-करते सातवीं बार में डिजाइन फाइनल हुआ. फिलहाल दूसरा प्रोटोटाइप बनकर तैयार हो गया है. अब इसे थोड़े बहुत बदलाव के बाद मार्केट में लॉन्च किया जाएगा.25 किलोमीटर प्रति घंटा स्पीड
अभिमन्यु की स्टार्टअप कंपनी वागा मोटर्स के तीन पहिया स्कूटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप साइकिल चलाना भी नहीं जानते हैं तो भी इसको चला सकते हैं. यह बेहतर संतुलन का एहसास दिलाती है. इसमें पावर किट लगा है, जो कि बैट्री ऑपरेटेड है. अधिकतम स्पीड 25 किमी प्रति घंटा है. इसको चलाने के लिए किसी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ेगी. तीन से चार घंटे में पूरी तरह से चार्ज किया जा सकता है. एक बार चार्ज होने पर यह लगभग 30 किलोमीटर तक चल सकता है. अभी इसकी क्षमता बढ़ाने पर काम हो रहा है.

 

अभिमन्यु ने साथ ही बताया कि इस बैट्री ऑपरेटेड स्कूटर की दूरी को 30 से बढ़ाकर 50 किमी तक किया जाए. इसको बनाने के लिए बिहार सरकार की तरफ से सीड फंडिंग और आईआईटी पटना से भी फंडिंग मिली है. इसके अलावा सीआईएमपी और आईआईटी पटना से समय-समय पर मार्गदर्शन भी मिलता रहा है.

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