सीवान : बिहार के सीवान जिला स्थित एक ऐसे मंदिर की हम बात करने जा रहे हैं, जिसकी कहानी अद्भुत है. जिला का यह एकलौता मंदिर है, जहां आज भी श्रद्धालु कुएं के जल से भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक श्रद्धालु करते हैं. यही वजह है कि इस शिव मंदिर का अपना एक अलग महत्व है. इस मंदिर की प्रसिद्धि सीवान सहित आस-पास के जिला में फैली हुई है. दरअसल, हम जिस शिव मंदिर की बात करने जा रहे हैं यह कोई और नहीं बल्कि जिला मुख्यालय के महादेवा स्थिति पंचमुखी शिव मंदिर है.

दरअसल, महादेवा शिव मंदिर 200 वर्ष से भी अधिक पुराना है. मंदिर की स्थापना के समय ही कुएं की भी खुदाई कराई गई थी ताकि भक्त भोले शंकर पर कुएं से जल निकाल कर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना कर सके. तभी से यह परंपरा चली आ रही है और आज भी यह परंपरा जीवत है. शिव भक्त कुएं से जल निकालकर जलाभिषेक करते हैं. मान्यता यह है कि भोले बाबा कुएं के जल से काफी प्रसन्न होते हैं. कुएं के जल से जलाभिषेक करने से भोले शंकर प्रसन्न होकर भक्तों पर कृपा बनाए रखते हैं और सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
महादेव के नाम से ही इलाके का नाम पड़ गया महादेवा
मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित वीरेंद्र पांडे ने बताया कि भगवान शंकर का शिवलिंग निकलना और पूजा-अर्चना होने के बाद यह स्थान काफी प्रसिद्ध हो गया. महादेव रूप के नाम पर बने इस मंदिर के कारण ही पूरे इलाके को महादेवा मोहल्ले के नाम से जाना जाने लगा. यही वजह है कि आज भी इस क्षेत्र को महादेवा हीं कहा जाता है. वहीं दूर-दराज के लोग महादेवा शिव मंदिर के नाम से भी इसे जानतें है.
जनता दरबार के नाम से प्रसिद्ध है महादेवा मंदिर
मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित वीरेंद्र पांडे ने बताया कि इस मंदिर का बहुत ही अद्भुत प्रसंग हैं. पंडित ने मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि सैकड़ों वर्ष पहले जब यहां बारिश नहीं हो रही थी तो सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई. तब महादेव नाम का व्यक्ति ने हल चलाया था. जिसमें भगवान का पंचमुखी शिवलिंग का प्रगट हुआ था. जिसके बाद से यहां भगवान भोलेनाथ पंचमुखी महादेव के नाम से विख्यात हो गए. जिला में यह मंदिर जगता दरबार से भी जाना जाता है. यह मंदिर 18 वी शताब्दी से भी पहले का है.