वर्दी में पिता को देख कोई ऑटो वाला नहीं रुका… तब बेटा बन गया ‘लिफ्टमैन’, पसंद आएगी ये मुहिम

पटना: बॉलीवुड फिल्म का एक गाना है, “अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर, एक मसीहा निकलता है…” उस समय भले ही यह गाना अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया था, लेकिन आज के दौर में अगर यह गाना फिल्माया जाए तो पटना के “लिफ्टमैन” पर यह सटीक बैठेगा. यह ‘लिफ्टमैन’ रोज अपने घर से बाइक निकालता है और सड़क पर लिफ्ट के इंतजार में खड़े लोगों की मदद करता है.

इस लिफ्टमैन का नाम है सुशील कुमार. पेशे से बॉडीगार्ड और नीयत से सड़कों पर खड़े लोगों के लिए मसीहा. सुशील ने अपनी बाइक के आगे बड़ा सा बोर्ड लगा रखा है. जिस पर लिखा है ‘हेलमेट आपका, लिफ्ट हम देंगे और दिलाएंगे’. लिफ्टमैन सुशील पिछले एक साल से यह काम कर रहे हैं. इनसे सीख लेते हुए इनके मोहल्ले के 50 से भी ज्यादा लोग अपने आसपास के लोगों को लिफ्ट देने लगे हैं. सुशील चाहते हैं की यह मुहिम उनके मोहल्ले से निकल कर देश तक फैले.

 

तीन घटनाओं ने बना दिया लिफ्टमैन
सुशील बताते हैं कि उनके पिता पुलिस में काम करते हैं. एक दिन अपने पिता के साथ वह भी जा रहे थे. उन्होंने देखा कि कोई भी ऑटो वाला रोक नहीं रहा है. जब अपने पिता से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि वर्दी में हूं, वह सोचता होगा कि पैसा नहीं देगा, फ्री में बैठेगा. इसी वजह से रोज ऑफिस जाने में लेट हो जाता है. सुशील को इस बात ने खूब परेशान किया. शाम को जब वह लौटने लगे तो बस में बहुत भीड़ थी. इसके बावजूद बस वाला सवारियों को बैठाए जा रहा था. किसी तरह धक्का-मुक्की खाते हुए जब वे अपने मोहल्ले में पहुंचे तो देखा कि एक 70 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति सड़क पर लिफ्ट का इंतजार कर रहे थे. चलने में असमर्थ थे, लेकिन ऑटो 2 किमी बाद मिलता था. कोई भी बाइक वाला रोक नहीं रहा था. कट मार कर निकल जा रहा था. एक दिन में हुई इन तीन घटनाओं ने सुशील को बहुत परेशान किया. फिर इस मानसिक परेशानी में तप कर जन्म हुआ लिफ्टमैन का. बॉडीगार्ड सुशील बन गए लिफ्टमैन.

लिफ्ट देने की मुहिम की शुरुआत
पिछ्ले एक साल से बॉडीगार्ड सुशील लोगों को लिफ्ट दे रहे हैं. रोज अपने ऑफिस जाने के दौरान सड़क पर जो भी मिलता है, उसको बैठा कर गंतव्य तक छोड़ आते हैं. रात को खास तौर पर लिफ्ट देने के लिए ही सड़क पर निकलते हैं. बुजुर्ग को प्राथमिकता देते हैं. हालांकि, रात में थोड़ी सावधानी से लोगों को बैठाते हैं. सुशील का मानना है कि अगर कोई बाइक चालक अपने परिचित गरीब, असहाय या बुजुर्ग को भी लिफ्ट देना शुरू कर दे तो किसी को भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. लोगों के पेट्रोल का खर्च भी बचेगा, पॉल्यूशन भी कम होगा और लोगों की मदद तो होगी ही. सुशील की इस मुहिम से प्रेरणा लेकर उनके मोहल्ले के करीब 50 बाइक चलाने वाले लोग लिफ्ट देने लगे हैं.

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