दरभंगा : चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के बाद अब सूर्य की ओर बड़े भारत के कदम में बिहार के कई लाल ने अहम भूमिका निभाई है. इसमें दरभंगा जिले के जाले प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत आने वाला रतनपुर गांव के मुकुंद ठाकुर भी शामिल हैं. जिन्होंने आदित्य L1 के सफल प्रक्षेपण में अहम भूमिका निभाई है. मुकुंद चंद्रयान-2 के प्रोजेक्ट में भी अपना योगदान दे चुके हैं.साथ में चंद्रयान 3 में मैकेनिकल इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर इन्होंने काम किया है.
जाले निवासी मुकुंद ठाकुर के ग्रामीण और स्थानीय जानकार विजय ठाकुर ने बताया कि सोलर मिशन को लॉन्च करने में वैज्ञानिकों की टीम में मुकुंद ठाकुर का अहम रोल था. आदित्य L1 की लांचिंग में मुकुंद को एक विशेष जिम्मेदारी के तौर पर स्ट्रक्चरल डिजाइन एनालिसिस एंड डेवलपमेंट की थी. वह HEL 1 ओस और ओलेक्स टीम के सदस्य थे. रिटायर्ड सैनिक श्रीराम ठाकुर का पुत्र आज वह कर दिखाया है जिससे पूरा मिथिलांचल गौरवान्वित महसूस कर रहा है. रिटायर्ड सैनिक श्रीराम ठाकुर के इकलौते पुत्र मुकुंद ठाकुर बतौर इसरो के इंजीनियर के तौर पर आदित्य L1 के सफल प्रशिक्षण में अपनी अहम भूमिका निभाई है. मुकुंद इसरो में सबसे पहले प्रोजेक्ट की शुरुआत मंगलयान से की थी.
देश के पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल1’ की पृथ्वी की कक्षा से संबंधित दूसरी प्रक्रिया मंगलवार तड़के सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई. इसरो के मुताबिक, कक्षा संबंधी दूसरी प्रक्रिया को बेंगलुरु स्थित इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) से अंजाम दिया गया.

इसरो ने बताया कि ‘आदित्य एल1’ की पृथ्वी की कक्षा से संबंधित तीसरी प्रक्रिया 10 सितंबर, 2023 को भारतीय समयानुसार देर रात लगभग ढाई बजे निर्धारित है.‘आदित्य एल1’ पहली भारतीय अंतरिक्ष आधारित वेधशाला है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित पहले सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु (एल-1) में रहकर सूरज के बाहरी वातावरण का अध्ययन करेगी.
इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी57) ने दो सितंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के दूसरे लॉन्च पैड से ‘आदित्य एल1’ का सफल प्रक्षेपण किया था। इस उपग्रह की कक्षा संबंधी पहली प्रक्रिया को तीन सितंबर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया था.