बिहार में बाढ़ की त्रासदी खत्म, लेकिन क’टाव का सिलसिला जारी

पूर्णिया : बिहार में बाढ़ की त्रासदी भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन कटाव का सिलसिला अभी भी जारी है. नदियां अभी भी लोगों के आशियानों को निगल रही है. लहरों का तांडव अभी भी तटबंध में रहने वाले लोगों को डरा रही है. पूर्णिया में कटाव ने लोगों का पीछा नहीं छोड़ा है. जिले के अमौर प्रखंड के असियानी गांव में परमान नदी से भीषण कटाव हो रहा है. जिसके चलते कई घर नदी में समा गए हैं. दरअसल, नदी का जलस्तर घटने लगा है. गुरुवार रात 12:00 बजे के बाद अचानक भीषण कटाव होने लगा और देखते ही देखते कई घरों को नदी ने लील लिया. वहीं, कटाव के बाद ग्रामीण दहशत में है.

Gandak's erosion is happening continuously for one month, people are afraid  of migration | एक माह से लगातार हो रहा गंडक नदी का कटाव, लोगों को पलायन का  सता रहा डर -

भूमि कटाव का सिलसिला जारी

नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीण बचे हुए मकानों को तोड़कर हटा रहे हैं और जरूरी सामान लेकर पलायन करने को मजबूर हैं. कटाव की सूचना मिलने पर मुखिया नैयर आलम समेत पंचायत समिति सदस्यों ने मौके का जायजा लिया और कटाव पीड़ित ग्रामीणों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. कटाव की मार तो बगहावासी भी झेल रहे हैं, लेकिन जिलेवासियों के लिए कटाव से भी बड़ी समस्या है भ्रष्टाचार. दरअसल, बगहा में कटाव रोधी कार्य में जमकर धांधली की जा रही है. इसका खुलासा तब हुआ जब गंडक नदी से बहेलिया गांव में कटाव की शिकायत लेकर ग्रामीण वाल्मीकि नगर के विधायक के पास पहुंचे.

विधायक ने किया कटाव का निरीक्षण

शिकायत पर विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह ने गंडक नदी के कटाव का निरीक्षण किया और बहेलिया गांव के बचाव कार्य और फल्ड फाइटिंग का भी जायजा लिया. इस दौरान कटाव रोधी कार्य में हुए लापरवाही और धांधली उजागर हुई. दरअसल, यहां कटाव को रोकने के लिए बोरियों में बालू और सिल्ट के बजाए मिट्टी भरा मिला. नायलॉन कैरेट में 25 की जगह 10-15 बोरियां ही मिली. इस धांधली को देख विधायक ने नाराजगी जताई और अभियंताओं को जमकर फटकार लगाया.

करोड़ों खर्च होने के बाद भी लोग झेल रहे कटाव की मार

विधायक धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने साथ ही कहा कि एक तरफ कटाव से तांडव मचा है. लोगों की जमीन, घर और खेतों को नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन अभियंताओं ने इस आपदा को अवसर बना लिया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. बिहार में कटाव रोधी कार्य हर साल होता है. बाढ़ से पहले बाढ़ प्रभावित जिलों में कटाव रोकने के लिए लाखों खर्च होते हैं, लेकिन अधिकारियों और बिचौलियों की इसी मिलीभगत के चलते करोड़ों खर्च होने के बाद भी लोग कटाव की मार झेलते हैं. हजारों घर पानी में समा जाते हैं. सैकड़ों परिवार बेघर हो जाते हैं. लोग पलायन करने को मजबूर होते हैं.

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