पटना के इन 5 ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन करना न भूलें, जो करती हैं हर मुराद पूरी

पटना जंक्शन के पास है महावीर मंदिर. यह करोड़ों लोगों की मदद करता है. अलग-अलग अस्पतालों के जरिए लोगों का इलाज का जिम्मा भी उठता है. महावीर मंदिर का महाप्रसाद नैवेद्यम आज तिरुपति मंदिर के बाद सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रसाद है. इसको तैयार भी वहीं के कुशल कारीगर करते हैं. यहां हनुमान जी के दो विग्रह एक साथ विराजमान हैं.

कृष्ण भक्तों के लिए पटना में सबसे बड़ा खास बुद्ध मार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर है. इसकी ऊंचाई 108 फीट से अधिक है. मथुरा और गुजरात के बाद पटना में देश का यह तीसरा इस्कॉन मंदिर है, जिसमें 84 खंभे हैं और इसे बनाने में पुरातन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. 84 खंभों के पीछे की वजह मनुष्यों के 84 लाख योनियों से जुड़ा है.

पटना के अगमकुआं स्थित शीतला माता का मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है. पुजारियों की मानें तो शीतला माता को चेचक का प्रतीक माना जाता है. इनकी पूजा करने व इनके नीर से लेप करने पर शरीर की गर्मी खत्म हो जाती है और कई तरह के रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है. यहां एक चमत्कारी कुआं भी है.

पटना में पटन देवी मंदिर है. इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है. पटन देवी को बड़ी पटन देवी मंदिर और पाटन देवी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. एक मान्यता यह भी है कि पटन देवी मंदिर की वजह से बिहार की राजधानी को पटना नाम दिया गया, क्योंकि यह मंदिर पौराणिक काल से विख्यात है. यहां दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु आते हैं.

राजधानी के गायघाट स्थित गौरीशंकर मंदिर ऐतिहासिक शिवमंदिरों में से एक है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यह शक्तिपीठ है. एक कथा के अनुसार अंग्रेजों ने इस प्रतिमा को ध्वस्त भी करना चाहा था. इसके लिए अंग्रेजों ने शिवलिंग पर गोलियां भी चलाईं. गोलियां दागने के बाद कुछ अप्रत्याशित घटना हुई और अंग्रेज सैनिक भाग खड़े हुए.

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