महज 22 साल की उम्र में नेशनल टेंगसुडो चैंपियन में आकाश ने जीता गोल्ड

पटना :एक कहावत है “करत-करत अभ्यास के जडमति होत सुजान, रसरी आवत-जात ते सिल पर परत निशान”. जिसका अर्थ है कि अभ्यास करने से अल्पबुद्धि भी विद्वान बन सकते हैं. तो ये सोचने वाली बात है कि अगर कोई सामान्य व्यक्ति किसी भी काम का बारंबार अभ्यास करे तो उसके परिणाम कैसे हो सकते हैं. मात्र दो साल की छोटी सी उम्र से मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस करने वाले पटना सिटी के आकाश पंकज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बता दें कि आकाश ने हाल ही में महाराष्ट्र में आयोजित नेशनल टेंगसुडो चैंपियनशिप में ना सिर्फ गोल्ड मेडल हासिल किया, बल्कि महाराष्ट्र के स्टार खिलाड़ी को हराकर बेस्ट फाइटर अवार्ड भी अपने नाम किया है.

22 साल के आकाश बताते हैं कि पिछले 20 सालों से मार्शल आर्ट की इतनी प्रैक्टिस कर चुके हैं कि अब विरोधी के कई किक और अटैक की टाइमिंग का अंदाजा पहले ही कर लेते हैं. आकाश इस जीत के बारे में कहते हैं कि यह 20 सालों की मेहनत का फल है. इसका पूरा श्रेय वे अपने कोच जयप्रकाश मेहता को देते हैं. आकाश पंकज आगे खेल जगत में ही कार्य करना चाहते हैं. इस कारण वे खेल के क्षेत्र में ही सरकारी सेवा में जाना चाहते हैं. इसके पीछे उनका ध्येय खुद की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ गरीब और टैलेंटेड बच्चों को आगे लाना है.

मामा बने पहले गुरु
आकाश बताते हैं कि उनके पहले गुरु उनके मामा विक्रांत पंकज बने. उन्हीं की प्रेरणा से आकाश ने मार्शल आर्ट की दुनिया में कदम रखा. आकाश बताते हैं कि सिर्फ टेंगसुडो ही नहीं, इसके अलावा स्केटिंग, कराटे और ताईक्वोंडो में भी वे कई मेडल जीत चुके हैं. ब्लैक बेल्ट की डिग्री हासिल कर चुके आकाश एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी देते हैं. इससे वे अपना खर्च भी निकाल लेते हैं.

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