बिहार : नवरात्रि के 10 वें दिन यानी 24 तारीख विजयादशमी का बहुत महत्व हैं. इस दिन अगर इन उपायों को नियमतः किया जाय तो आपकी कही भी पराजय नहीं होगी. हर जगह आपको सफलता मिलेगी. पूर्णिया के पंडित व ज्योतिषी दयनाथ मिश्र कहते हैं कि नवरात्रि में नवमी के बाद दशमी तिथि आती है लोग उसे विजयादशमी के नाम से जानते हैं. उसे दिन खासतौर कर अपराजिता पूजा होती है. मां सरस्वती की पूजा खासकर दशमी के दिन की जाती है. वहीं सरस्वती जो दुर्गा माता के साथ रहती हैं. उनकी पूजा विशेष रूप से अपराजिता के साथ होती है. इस दिन अपराजिता को लोग अपने अंगों पर भी बांधते हैं, जिससे बहुत लाभ होता है.
अपराजिता बंधन में इन चीजों की होगी जरूरत
उन्होंने कहा इस दिन अपराजिता बंधन होता है. इसको बांधने के लिए श्रद्धालुओं को पीला कपड़ा में अपराजिता का फूल और उसमें पीली सरसों, वॉच और जटामासी और शमी का पत्र इत्यादि चीजों को एक पीले कपड़े में बांधकर अपने अंगों पर बांधते हैं. इससे जीवन में कभी भी हार का सामना नही करना होगा हर तरफ आपको सफलता मिलेगी. मां भगवती दुर्गा का विसर्जन दशमी तिथि को होता है. इसलिए इस दिन जाने के समय यानी यात्रा के समय हर जगह नियम पूर्वक दही और चूड़ा का ही भोग लगाया जाता हैं. यह अत्यंत जरूरी माना जाता हैं. इसलिए मां की विदाई दही चूड़ा का भोजन कराकर किया जाता है.

ऐसे में लोग अपने मुताबिक पूजा पाठ करते हैं, लेकिन मां से क्षमा प्रार्थना लोग रोज करते हैं. हालांकि इस दिन मां जाती हैं और ऐसे में वो अपने बच्चों की हर भूल को माफ करती हैं. इसलिए जाने के समय विशेष क्षमा मांगते हैं. मां हम तो पूजा पाठ नहीं जानते हैं आपका पूजा कैसे किया जाता है. हम तुम्हारी पूजा नहीं जानते हैं. हमसे जो भी भूल हुई, गलती हुई हो उसे क्षमा करना और प्रसन्न होकर पूरा आशीर्वाद बनाये रखना.